नई दिल्ली, अक्टूबर 1। कहा जाता हैं अगर कोई व्यक्ति पूरी मेहनत और लगन के साथ किसी काम को करता हैं तो फिर उसको सफलता जरूर मिलती हैं। बस इसके लिए जरूरत हैं किसी भी काम को पूरी लगन के साथ किया जाए। एक व्यक्ति की सफलता उसके आने वाली पीढ़ी की दिशा और दशा को तय करती हैं। आज हम आपको जिस व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं। उसका जन्म तो गरीब परिवार में हुआ था। मगर आज उसने अरबों का कारोबार खड़ा कर दिया हैं।
अपनी मेहनत से बनाया अरबों का कारोबार
रघुनंदन श्रीनिवास कामत का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी उनके पिता 7 बच्चो का पालन पोषण लकड़ियों को बेच कर करते थे। अपने परिवार की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए कामत अपने भाइयों के साथ मुंबई आ गया।
आइसक्रीम का बिजनेस शुरू करने का निर्णय लिया
कामत उनके भाइयों के साथ एक ढाबे में काम करते थे। वही उन्होने लोगों को आइसक्रीम खरीदते देखा तो उनको कुछ अलग करने का विचार आया। इसी बीच उनका विवाह हो गया। मगर उन्होंने मैच्योर होने पर आइसक्रीम का व्यापार शुरू करने का निर्णय के लिया था। 14 फरवरी 1984 को उन्होंने जूहू में नेचुरल आइसक्रीम मुंबई के नाम से एक आउटलेट ओपन किया। शुरू में उनके यह अधिक लोग नही आते थे जिससे वे चिंतित थे। वे लगातार व्यापार बढ़ाने का सोचते थे।
पाव भाजी बेचना भी शुरू किया
अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए और आइसक्रीम को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए उनके आइसक्रीम के बिजनेस के साथ मसालेदार पावभाजी का बिजनेस शुरू किया। लोग अब पावभाजी खाने के लिए आते थे लोग तीखा खाकर कामत की ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाते ऐसे में उनका बिजनेस धीरे धीरे बिजनेस बढ़ने लगा।
शुरुआत हुई थी इन फ्लेवर से
कामत ने शुरू में दूध, फल और चीनी के साथ आम, चॉकलेट के फ्लेवर वाली आइसक्रीम बनाई। उनकी आइसक्रीम में किसी भी तरह की मिलावट नही थी। फिर लोगों का धीरे धीरे उन पर विश्वास बढ़ने लगा। उन्होंने बाद में पाव भाजी बेचनी बंद कर दी और नेचुरल के आइसक्रीम पार्लर को जारी रखा कम्पनी की वेबसाइट के मुताबिक आज पूरे देश में इनके 135 आउटलेट हैं और 5 फ्लेवर्स से इस बिजनेस की शुरुआत हुई थी और आज ये कंपनी लोगों तक 20 फ्लेवर्स की आइसक्रीम पहुंचा रही हैं। आज इनका कारोबार 300 करोड़ से भी अधिक का पहुंच गया हैं।


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