नई दिल्ली, सितंबर 18। इस समय एनएसई निफ्टी, बीएसई सेंसेक्स, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांक रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे हुआ यह है कि कुछ शेयर 2021 में मल्टीबैगर (कई गुना पैसा कर देने वाले शेयर) साबित हुए हैं। एएनजी लाइफसाइंसेज भी ऐसे ही शेयरों में शामिल है। यह एक फार्मा कंपनी है। इसका स्टॉक पिछले छह महीने 85.50 रु प्रति स्टॉक स्तर से बढ़ कर 642.10 रु पर पहुंच गया। यानी बीते 6 महीनों में इस शेयर से शेयरधारकों को लगभग 650 प्रतिशत रिटर्न मिला है। इसका मतलब है कि अगर किसी ने 6 महीने पहले 1 लाख रु का निवेश हो तो उसकी निवेश राशि आज के समय में करीब 7.5 लाख रु हो गयी होगी।
जानिए कंपनी की डिटेल
एएनजी लाइफसाइंसेज उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश राज्य में बद्दी के हरे-भरे, प्रदूषण मुक्त क्षेत्र में स्थित एक अति आधुनिक, फुली इंटीग्रेटेड, डेडिकेटेड इंजेक्टेबल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के साथ एक तेजी से बढ़ता हुई कंपनी है। इस कंपनी की शुरुआत 2008 में हुई थी। कंपनी की वेबसाइट की अनुसार एएनजी लाइफसाइंस क्वालिटी प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के लिए प्रतिबद्ध है जो बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार करें।
निवेश हुए मालामाल
बीते 1 महीने में भी इस शेयर ने अच्छा रिटर्न दिया है। ये शेयर एक महीने में 22 फीसदी रिटर्न देने में कामयाब रहा है। यानी इस शेयर ने एक महीने में 1 लाख रु की निवेश राशि को 1.22 लाख रु बना दिया है। इसी तरह शेयर ने 3 महीनों में 1 लाख रु के निवेश को 3.56 लाख रु बना दिया है। 16 जून को यह शेयर 180.35 रु के भाव पर बंद हुआ था।
कंपनी देगी बोनस शेयर
हाल ही में एएनजी लाइफसाइंसेज इंडिया लिमिटेड ने प्रत्येक 10 रुपये वाले शेयर के बदले 10 रुपये वाला 1 बोनस इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दे दी है। निदेशक मंडल के सदस्यों ने 23 सितंबर, 2021 को बतौर रिकॉर्ड तिथि तय किया है। यानी इस दिन जिन लोगों के पास शेयर होगा वे बोनस शेयर के पात्र होंगे। उनके नाम 23 सितंबर 2021 की रिकॉर्ड तिथि पर सदस्यों के रजिस्टर में दिखाई देंगे।
तीन साल में मुनाफा
तीन साल की अवधि में, इस स्टॉक ने एसएंडपी बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स के 65.04 प्रतिशत की तुलना में करीब 980 प्रतिशत रिटर्न दिया। कंपनी ने निवेश ऑपरेशन पर 1.66 करोड़ रुपये खर्च किए, जो साल दर साल 114.66 प्रतिशत अधिक है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 के लिए 43.89 प्रतिशत की तुलना में स्टॉक ने तीन वर्षों में 983.06 प्रतिशत रिटर्न दिया है।
फार्मा कंपनियों का धमाल
फार्मा कंपनियां लंबे समय से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में आगे रही हैं। भारत में बनी दवाओं ने अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अपनी पहचान बना ली है। इसके अलावा, भारत की लागत किफायती है क्योंकि इसके फार्मास्यूटिकल्स कम महंगे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य देखभाल खर्चों में कटौती करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि फार्मा कंपनियां लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और इससे निवेशकों को भी फायदा हो रहा है।


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