नई दिल्ली, अप्रैल 7। कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। बहुत से लोग अपने कुछ सपनों को पूरा करने के लिए काफी कोशिश करते हैं। आखिरकार उन्हें कामयाबी भी मिलती है। एक दिहाड़ी मजदूर की कहानी कुछ ऐसी ही है। ये दिहाड़ी मजदूर असम का रहने वाला है। इसका नाम है उपेन रॉय। उपेन रॉय राजधानी गुवाहाटी के बोरगांव इलाके में पार्ट टाइम काम करते हैं। उनकी एक इच्छा थी अपना दोपहिया वाहन खरीदने की। मगर उनके पास इतना बजट नहीं था। इसके लिए उन्होंने एक खास तरीका निकाला और आखिर में अपना स्कूटी खरीदने का सपना पूरा किया।
1 रु से 10 रु तक के सिक्के जोड़े
रॉय ने पिग्गी बैंक में पैसे जोड़ना शुरू किया। वे 1 रु, 2 रु, 5 रु और 10 रु के सिक्के जमा करने लगे। उन्होंने स्कूटी खरीदने लायक पैसे जुटाने में कई साल लगे। मगर आखिरकार उन्होंने इतने पैसे जोड़ ही लिये कि वे एक नयी स्कूटी खरीद सकें। अंत में उपेन रॉय ने अपने सपने को पूरा किया।
लगा 8 साल का समय
उपेन रॉय ने स्कूटी खरीदने के लिए पैसा जोड़ना 2014 में शुरू किया। वे लगातार अपनी पिग्गी बैंक में 1 रु, 2 रुपये, 5 रुपये और 10 रुपये के सिक्के जमा करते रहे। उन्होंने 8 साल की अवधि में पिग्गी बैंक में 1.5 लाख रुपये जमा किए। रॉय ने इतने पैसे जमा करने के बाद अपनी पत्नी के साथ स्कूटी खरीदने पहुंचे। सिक्के लेकर वे नजदीकी शोरूम में गए। उन्होंने 90,000 रु में स्कूटी खरीदी।
काफी खुश हुए उपेन
स्कूटी खरीदने के बाद उपेन रॉय काफी खुशी हुए। रिपोर्ट के अनुसार रॉय खुशी से रोने लगे। वे कहते हैं कि बाइक खरीदना उनका सपना था। इसके लिए वे 2014 से ही ये सिक्के जमा कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने इसकी गिनती की। उन्हें पता चला कि वे अब बाइक खरीदने के लिए तैयार हैं।
शोरूम के मालिक हैरान
टू-व्हीलर शोरूम के मालिक उस समय हैरान रह गये जब उन्होंने देखा कि रॉय सिक्कों का स्टॉक लेकर बाइक खरीदने आये हैं। उन्होंने अपने बैंक से संपर्क किया और पूछा कि क्या वे इतनी बड़ी मात्रा में सिक्के स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने कुछ विक्रेताओं और दुकानदारों से सिक्के लेने के बारे में बात की। शोरूम के चार कर्मचारियों ने सिक्के गिने। इसमें 4 घंटों का समय लगा। अंत में उपेन रॉय को स्कूटी मिल गई।
1 रु के सिक्कों से बाइक
हाल ही में 29 वर्षीय वी बूपति ने बजाज डोमिनार 400 खरीदने के लिए 1 रु के सिक्कों में पेमेंट की। इसके लिए वे नकदी साथ लाए। ये 1 रु के सिक्के उन्होंने तीन साल से अधिक समय में जोड़ी। काफी मेहनत से वे ये बचत कर पाए। उन्होंने मंदिरों, होटलों और चाय की दुकानों पर एक रुपये के सिक्कों के बदले अपने सारे करेंसी नोटों को एक्सचेंज किया। शोरूम के मैनेजर महाविक्रांत ने कहा कि वह पहले सिक्कों में पैसे स्वीकार करने से हिचक रहे थे, लेकिन उन्होंने इसलिए हार मान ली क्योंकि वह बूपति को निराश नहीं करना चाहते थे। बूपति के हाई-एंड बाइक खरीदने के सपने को देखते हुए उन्होंने आखिरकार इन सिक्कों को स्वीकार कर लिया।


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