नई दिल्ली, अगस्त 01। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग का एक सर्वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, सर्वे में बार चार्ट के जरिए दुनिया की कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आने की आशंकाओं को दिखाया गया है। सर्वे की रिपोर्ट में चिन और जापान जैसी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की संभावना को 20 से 25 प्रतिशत बताया गया है तो वहीं रिपोर्ट में भारतीय इकोनॉमी के मंदी में जाने की संभावनाओं को शून्य बताया गया है।
विश्व अर्थव्यवस्था में गिरावट
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने भी 26 जुलाई को विश्व की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी रिपोर्ट वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक का अपडेट जारी किया था। आईएमएफ ने अपने अपडेटेड रिपोर्ट में ग्लोबल इकनॉमी की वृद्धि दर का अनुमान 3.6 प्रतिशत से घटाकर 3.2% कर दिया है। अगर हम पिछले वर्ष की बात करें तो विश्व की अर्थव्यवस्था 6.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। विश्व इकोनॉमी को लेकर एक और संस्था नोमुरा ने अपने हालिया रिपोर्ट में भी दावा किया है कि इस फाइनेंशियल इयर में अमेरिका, यूरोप, कनाडा, जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया जैसी तमाम टॉप अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आ सकती हैं। नोमुरा की रिपोर्ट में चीन में फिलहाल मंदी का खतरा नहीं दिख रहा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
ब्लूमबर्ग के सर्वे रिपोर्ट की मानें तो भारत में वैश्विक मंदी का असर नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल बार चार्ट में दुनिया की कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मंदी में फंसने की आशंका को बताया गया है। लेकिन भारत में भी वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर दिख रहा है। नोमुरा और आईएमएफ ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाया है। भारत में महंगाई का असर है लेकिन अन्य देशों की तुलना में भारतीय की स्थिती अभी मजबूत है।
बाजार में है सुस्ती
फिलहाल यदि दुनिया भर में रोजमर्रा की जरूरी समानों की कीमतों को देखें तो मंदी की झलक को साफ देखा जा सकता है। हालांकि खाद्य तेलों की कीमते बाजार में कम हुई हैं। ।लेकिन कच्चे तेल की किमत कम होती नहीं दिख रही है। सिटीग्रुप ने हाल ही अपने अनुमान में बताया है कि साल के अंत तक कच्चा तेल $65 रुपए प्रति बैरल तक पहुंच सकता है और 2023 के अंत तक कच्चा तेल $45 प्रति बैरल पर पहुंच जाएगा। तेलो की घटती किमतो के बावजूद बाजार में सुस्ती नजर आ रही है।


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