नई दिल्ली, अगस्त 3। एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने 6 वर्ष पहले 12वीं पास स्टूडेंट्स को डेवलपर बनाने का सपना देखा था। एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के 12वीं पास छात्रों को प्रशिक्षित कर प्रोग्रामर्स बनाना शुरू किया। कंपनी 80 स्टूडेंट्स के 6 वर्ष पहले ये शुरू हुई थी। फिर आने वाले कुछ सालो में कम्पनी ने कस्टमर्स और स्टूडेंट्स के फीडबैक लिए और प्रोग्राम बनाया। एचसीएल ने लास्ट ईयर 4 हजार 12वी पास छात्रों को प्रोग्रामर्स बना चुकी है। कम्पनी का उद्देश्य आने वाले वर्ष में 15 हजार छात्रों को प्रोग्रामर्स बनाने का है।
ग्रेजुएट प्रोग्राम में भी प्रवेश दिया जाता है
एचसीएल टेक्नोलॉजीजी के एचआर हेड अप्पाराव वीवी कहते है डिजिटल से लोग काफी अधिक जुड़ रहे है इसलिए एचसीएल को डेडिकेटेड और स्टेबल टैलेंट प्रदान करता है। यह कॉस्ट स्ट्रक्चर में भी स्थायित्व लाता है। इस प्रोग्राम को टेकबी के नाम से जाना जाता है। साथ ही संस्थान में ग्रेजुएट प्रोग्राम में भी प्रवेश दिया जाता है, जिनकी एचसीएल के साथ साझेदारी है। इनमें बिट्स पिलानी, शास्त्र, सिम्बायोसिस, एमिटी और आईआईएम नागपुर जैसे संस्थान शामिल हैं। इनमें कक्षा वीकेंड्स पर होती हैं।
जॉब और ट्रेनिंग प्रोग्राम
छात्रों को एचसीएल की तरफ से जॉब और ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान 10 हजार रुपए प्रति माह भुगतान करता है। जॉब के पहले 2 लाख पचास हजार रुपए साल के दिए जाते है। दूसरे वर्ष सैलरी 3.5 लाख रुपए तक हो जाती है। कंपनी ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए भी भुगतान करती है। बदले में स्टूडेंट को ग्रेजुएशन के बाद दो साल तक एचसीएल के साथ काम करना होता है।
एप्टीट्यूड टेस्ट के जरिए छात्रों का चयन
एप्टीट्यूड टेस्ट के जरिए छात्रों का चयन किया जाता है। इस टेस्ट में अंग्रेजी और गणित के प्रश्न होते हैं। इन स्टूडेंट्स को प्रोग्राम के लिए शुरुआत में एक लाख रुपये का भुगतान करना होता है।


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