नई दिल्ली, जून 28। पहले भारत में परंपरागत खेती ही की जाती थी। मगर समय के साथ किसानों ने नये-नये आइडिया अपनाए और तरह-तरह की नई फसलें उगाईं। कुछ किसानों ने तो ऐसी फसलें भी उगाई कि उन्हें मुनाफा और नाम दोनों मिला। ऐसे किसानों की खबरें अकसर सामने आती रहती हैं। अब ऐसा ही एक और मामला सामने आया है दक्षिण भारत से। तमिलनाडु में कुछ किसानों ने मिल कर केले से लाखों रु की कमाई की है। किसानों का यह समूह इस समय चर्चा में है। जानते हैं कि कैसे उन्होंने एक सामान्य फल से इतनी कमाई करने का रास्ता ढूंढ लिया।
परेशानी में थे किसान
हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के किसानों की। यहां छोटे किसान काफी अधिक संख्या में है। यहां के किसान केला काफी अधिक उगाते हैं। मगर ये इतना अधिक हो जाता था कि किसानों के बेचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। दरअसल यहां कावेरी नदीं बहती है। जिससे किसान सिंचाई की तरफ से टेंशन फ्री हैं और खेती फसल बढ़िया होती है।
क्या निकाला आइडिया
केले का अधिक उत्पादन यहां के किसानों के लिए एक समस्या बन गया था। असल में केले की मांग से अधिक उत्पादन हो रहा था। दूर-दराज के इलाकों में अधिक केलों को बेचने पर किसानों को अधिक पैसे भी खर्च करने पड़ते थे। फिर यहां के किसानो ने एक आइडिया निकाला और वे केले को सुखा कर बेचने लगे। केला बहुत जल्द खराब हो जाता है। इसे सही सलामत रखने के लिए कोल्ड-स्टोरेज होना जरूरी है। मगर यहां के किसानों के पास ऐसी सुविधा नहीं थी। इसीलिए उन्होंने केले को सुखा कर बेचने की तरकीब निकाली।
13 किसानों ने मिलाया हाथ
7 साल पहले 2014 में 13 किसानों ने हाथ मिलाया और केले को सुखा कर बेचने का काम करना शुरू किया। इन किसानों ने एक केला उत्पादक समूह की शुरुआत की। अच्छी बात यह रही कि इन किसानों को सरकार से भी मदद मिली। तमिलनाडु सरकार की एक योजना है। ये है सौर्य ऊर्जा वाली डिहाइड्रेशन परियोजना। ये इन किसानों के काफी काम आई। राज्य सरकार इस परियोजना के तहत ऐसी यूनिट लगाने पर 50 फीसदी सब्सिडी दे रही थी।
सालाना कमाई 15 लाख रु
तमिलनाडु केला उत्पादक कंपनी और किसान के बीच समझौता हुआ ताकि ज्यादा ग्राहकों तक प्रोड्क्ट पहुंचाया जाए। ऑनलाइन मार्केटिंग भी इस प्रोसेस में काफी अहम साबित हुई। बता दें कि इस काम में शुरुआत में 35 लाख रु का निवेश करना पड़ा था। मगर अब किसानों की इस कंपनी की सालाना कमाई 15 लाख रु है। ये समूह अब ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने और भी काम करता है।
कितनी है क्षमता
इस केला उत्पादक समूह हर माह 12 हजार प्रति केलों के 5 बैच सुखाता है। इन केलों से कई अन्य प्रोडक्ट बनते हैं। इन प्रोडक्ट्स को युवा काफी पसंद करते हैं। अब ये समूह बड़ी संख्या में दूसरों को रोजगार देता है। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र ने 2014 में इस समूह को अवॉर्ड भी दिया था।
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