नई दिल्ली, जुलाई 06। रुपए के वैल्यू में गिरावट लागातार जारी है। मंगलवार को भी रुपया विश्व बाजार के स्थितियों और भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों के नीकासी एक नए रिकॉर्ड स्तर पर गिर गया। भारत को रुपए में गिरावट को लेकर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इस वित्तीय वर्ष में भारत को ज्यादे विदेशी ऋण चुकाना है और आगामी वित्त वर्ष में भारत का व्यापार और ज्यादा बढ़ेगा जिससे भारतीय विदेशी रिजर्व मुद्रा पर भारी दबाव बनने के आसार है।
अर्थव्यवस्था पर है दबाव
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार अगले नौ महीनों में भारत को अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 40 प्रतिशत से अधिक धन से विदेशी ऋण भरना है। भारत के पास अभी कुल 621 बिलियन डॉलर का फॉरेन रिजर्व है जिसमें से 267 बिलियन डॉलर का विदेशी ऋण अगले नौ महीनों में चुकाना है। यह भुगतान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 44% हिस्सा है। जानकारों का मानना है कि अगर जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो इतने कम अवधि में कर्ज को भरने से रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
इकोनॉमिक टाइम्स के खबर के मुताबिक रुपए का मौजूदा स्थानीय मैक्रो सेटअप मुख्य रूप से तेल आयात के कठिनाइयों के कारण रिकॉर्ड घाटे में है। इसके साथ-साथ विश्व बाजार में मंदी का माहौल और अमेरिका के बाजार में लगातार गिरावट ने भी रुपए की वैल्यू को प्रभावित किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने विश्व सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। जिसके वजह से विश्व को पेट्रोलियम और तमाम कमोडिटिज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर आया रुपया
भारत को जून में रिकॉर्ड 25.6 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है। जून में हुए व्यापार घाटे की रिपोर्ट जारी होने के तुरंत बाद रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79.38 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया आज आधे प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 79.37 पर बंद हुआ। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि चालू घाटा या निर्यात से अधिक आयात भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 3.1% हो जाएगा जो पिछले साल मात्र 1.2% था। देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छी खबर नहीं है।
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी
फिलहाल विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है। लेकिन इसकी मात्रा लगातार घट रही है क्योंकि आरबीआई ने फरवरी में विदेशियों के रिकॉर्ड पोर्टफोलियो नीकासी के प्रभाव को कम करने के लिए 41 बिलियन डॉलर की बिक्री थी। 3 सितंबर, 2021 को विदेशी मुद्रा भंडार 642.5 अरब डॉलर का था जो 24 जून तक गिरकर 593.3 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार का 600 बिलियन डॉलर से कम होना अच्छा संकेत नहीं है।
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