नई दिल्ली, सितंबर 04। नौकरी की तलाश करना आज के समय काफी कठिन काम हो गया है। इस पर भी अगर आपकी आयु अधिक हो जाए तो बहुत सी कंपनियां आपके लिए दरवाजे बंद कर देती हैं। सरकारी कर्मचारी तो आराम से 58, 60, 62 साल की उम्र तक नौकरी करते हैं। वे एक मैच्योर आयु में रिटायर होते हैं। मगर अब समस्या प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के सामने आ रही हैं। ऐसे लोगों के सामने 50 साल से अधिक की आयु में नौकरी पाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि आप भी प्राइवेट सेक्टर में जॉब कर रहे हैं तो आपको भी इस चुनौती के लिए सावधान रहना चाहिए।
क्या है कंपनियों की प्लानिंग
प्राइवेट कंपनियों की जो प्लानिंग है उसके तहत वे नौकरी देते समय अनुभव के मुकाबले उम्र पर फोकस कर रही हैं और कम आयु वालों को प्राथमिकता दे रही हैं। कोरोना महामारी के बाद ऐसा देखने को मिल रहा है, क्योंकि कई कंपनियों ने हायरिंग पॉलिसी में बदलाव किया है। 50 साल से अधिक आयु वालों के लिए हालात खराब हो गए हैं। इस आयु से अधिक वालों को कंपनियां की तरफ से कॉल तक नहीं की जा रही। यानी उनको इंटरव्यू तक के लिए नहीं बुलाया जाता।
यंग जनरेशन पर अधिक भरोसा
कुछ रिपोर्ट्स ऐसी सामने आई हैं, जिनमें खुलासा हुआ है कि बीते कुछ सालों में प्राइवेट कंपनियों ने यंग जनरेशन पर ज्यादा भरोसा जताया है। कंपनियों क अनुसार उम्र और अनुभव ज्यादा होने पर कर्मचारी पुराने ख्यालों वाले हो सकते हैं। नए लोग नई सोच रखते हैं। इसीलिए पिछले कुछ सालों के डेटा से पता चलता है कि कंपनियों ने 21 से 28 साल के लोगों को ज्यादा नौकरी के ऑफर दिए हैं।
28-50 साल वालों के लिए मुश्किलें
आंकड़े बताते हैं कि 28-50 साल तक आयु के लोगों को कम संख्या में नौकरी ऑफर की गयी है। वहीं 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लिस्ट से बाहर रखने का सिलसिला शुरू हो गया है। ऐसा लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिला है। हां मैन्युफेक्चिरिंग सेक्टर इनमें एक अपवाद है। बाकी सेक्टरों में इतनी आयु वालों के लिए दरवाजे बंद हो रहे हैं।
इन सेक्टरों में युवाओं की मौज
कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जिनमें युवाओं पर अधिक फोकस किया जा रहा है। इनमें एफएमसीजी, फार्मा, बैंकिंग और वित्त, गैर-बैंकिंग वित्त और जीवन बीमा शामिल हैं। समस्या यह है कि भारत में इस तरह के भेदभाव को रोकने के लिए कोई नियम-कानून नहीं है। मगर कुछ पश्चिमी देश इस मामले में जागरूक हैं और वे इस स्थिति के मद्देनजर कानून बना चुके हैं।
पश्चिमी देशों में विरोध
हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार कई पश्चिमी देश इस नये ट्रेंड की निंदा करते हैं। रिपोर्ट में एक घटना का जिक्र किया गया है और बताया गया कि एक एफएमसीजी कंपनी को सीईओ की तलाश थी, मगर इसने कहा कि कम उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। पर कंपनी ने 53 साल वर्षीय को नौकरी दी और उसने अपनी सूझबूझ से कंपनी की तस्वीर को 2 सालों में ही बदल दिया। यानी अनुभव हमेशा काम आता है।
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