नयी दिल्ली। टेलीकॉम कंपनियों के बीच इस समय प्राइस वॉर पूरे चरम पर है। तीनों प्रमुख कंपनियों रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन में से कोई न कोई हर दूसरे दिन अपना नया प्लान पेश करती रहती हैं। मगर इसी तगड़े कॉम्पिटीशन के बीच एयरटेल की तरफ से वोडाफोन आइडिया के फेवर में एक बयान आया है। भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्ठल ने कहा है कि वोडाफोन आइडिया को बचने रहने के लिए संघर्ष करना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक भारतीय टेलीकॉम सेक्टर को त्रिकोणिय रहना जरूरी है, क्योंकि इससे निवेश को बढ़ाने, नौकरियों में कटौती को रोकने और टेलीकॉम इंडस्ट्री की साख को उभारने में मदद मिलेगी। बता दें कि इस समय भारत में सिर्फ तीन ही प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां बची हैं। इनमें घाटे और एजीआर चुकाने के दबाव की वजह से वोडाफोन आइडिया का हालत खस्ता हो चुकी है। बल्कि पिछले साल कंपनी की तरफ से भारत में कारोबार बंद करने के संकेत भी दिये गये थे।
एआरपीयू बढ़ाने की वकालत
एयरटेल सीईओ विट्ठल ने एआरपीयू (प्रति उपभोक्ता औसत आमदनी) को बढ़ाने की वकालत की है। उनके मुताबिक तीन साल के तगड़े प्राइस वॉर के बाद स्थिरता और डेवलप होने के लिए एआरपीयू का 300 रुपये तक पहुँचना टेलीकॉम कंपनियों के लिए जरूरी है। किसी भी टेलीकॉम कंपनी के लिए एआरपीयू में बढ़ोतरी बेहद जरूरी है। पिछले साल जियो, एयरटेल और वोडाफोन ने जब अपने प्लान एक साथ महंगे किये थे तब उनका एक मकसद एआरपीयू बढ़ाने का भी था। बल्कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में तो एयरटेल के एआरपीयू में बढ़ोतरी भी हुई है।
वोडाफोन पर एजीआर का भारी दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि सरकार से भुगतान की शर्तों में कोई राहत न मिलने पर वोडाफोन आइडिया के बचे रहने की उम्मीद कम हो जायेगी, क्योंकि कर्ज से दबी 30 करोड़ से अधिक ग्राहकों वाली वोडाफोन के पास एजीआर चुकाने के लिए नकदी नहीं है। एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। वोडाफोन आइडिया पर 53000 करोड़ रुपये का बकाया एजीआर है। वहीं एयरटेल पर भी 35,500 करोड़ रुपये के एजीआर की देनदारी है। जियो ने अपने एजीआर का भुगतान कर दिया है। जियो पर एयरटेल और वोडाफोन के मुकाबले एजीआर बहुत कम था।
सुप्रीम कोर्ट में है याचिका
वोडाफोन आइडिया, एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें आग्रह किया गया है कि उन्हें एजीआर भुगतान के लिए तौर-तरीकों और समय सीमा पर बातचीत करने की अनुमति दी जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इनकी एक याचिका के बाद रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर चुका है। अब इन कंपनियों ने शीर्ष अदालत में संशोधन याचिका दाखिल की हुई है।
यह भी पढ़ें - Airtel डाल सकती है ग्राहकों पर बोझ, बढ़ायेगी मोबाइल प्लान के दाम
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