नयी दिल्ली। टेलीकॉम सेक्टर में इस समय प्राइस वॉर और कॉम्पिटीशन पूरे ऊफान पर है। टेलीकॉम सेक्टर में अब तीन ही बड़ी कंपनियां बाकी हैं, जिनमें एयरटेल, जियो और वोडा शामिल हैं। इन तीनों की हालत काफी अलग है। जियो लगातार विस्तार करते हुए देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन चुकी है, तो वहीं आइडिया के साथ विलय के बावजूद वोडाफोन अपना अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है। एयरटेल की स्थिति जियो से कमजोर मगर वोडाफोन से काफी बेहतर है। यदि वोडाफोन भारत में अपना कारोबार समेट ले तो एयरटेल का सीधा मुकाबला जियो से होगा। वोडाफोन इसका संकेत पिछले महीने दे चुकी है। मगर फाइनेंशियल लिहाज से एयरटेल भी जूझ रही है। एयरटेल को भी सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद हजारों करोड़ रुपये का एजीआर चुकाना है। वहीं 5जी के लिए स्पेक्ट्रम भी चाहिए, जिसके लिए कंपनी को करोड़ों रुपये की जरूरत होगी। इसी सब के बीच एयरटेल एक नयी राह पर निकल गयी है। दरअसल अब एयरटेल भारतीय नहीं बल्कि विदेशी कंपनी बनने जा रही है।
सरकार से मिली 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी
सिंगापुर की सिंगटेल और कुछ अन्य विदेशी कंपनियों द्वारा एयरटेल में 4900 करोड़ रुपये के निवेश के लिए भारती टेलिकॉम ने सरकार से मंजूरी मांगी थी। अब एयरटेल को सरकार से 100 फीसदी एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) की मंजूरी मिल गयी है। यानी एयरटेल अपनी पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को बेच सकती है। एयरटेल के लिए यह सीमा अभी तक 49 फीसदी थी। एयरटेल के इस कदम को जियो से टक्कर लेने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एयरटेल को आरबीआई से भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 74 फीसदी तक रखने की इजाजत मिली हुई है।
एजीआर का दवाब बहुत ज्यादा
एयरटेल पर दूरसंचार विभाग को एजीआर या एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू चुकाने का भी बहुत दबाव है। कंपनी एजीआर के लिए 35,586 करोड़ रुपये चुकाने हैं। वहीं उचित 5जी स्पेक्ट्रम के लिए कंपनी को 36,900 से 49,200 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसलिए कंपनी ने हाल ही में क्यूआईपी इश्यू के जरिये शेयर बेच कर 3 अरब डॉलर यानी करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाये थे। मिंट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एयरटेल पैसों के लिए टावर संपत्तियों को बेचने की तैयारी में भी है। जानकारों को उम्मीद है कि दिसंबर में प्लान महंगे करने के बाद एयरटेल की फाइनेंशियल हालत में सुधार होगा।
हालत में हुआ है सुधार
विश्लेषक कहते हैं कि 21000 करोड़ रुपये जुटाने से एयरटेल एजीआर के फैसले के बावजूद अच्छी हालत में है। सरकार की तरफ से 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी मिलने से आगे कंपनी और फंडिंग जुटायेगी। साथ ही प्लान महंगे करने का असर आने वाली तिमाहियों में एयरटेल के फाइनेंशियल रिजल्ट पर दिखेगा। इस लिहाज से मुकेश अंबानी की जियो को टक्कर देने के लिए एयरटेल की काफी तैयारी है, क्योंकि आगे मुकाबला और कड़ा हो सकता है। इस समय एयरटेल में सिंगटेल की हिस्सेदारी 36 फीसदी हिस्सेदारी है।
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