एजीआर मामले में टेलीकॉम कंपनियां वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएँ दायर कीं, बकाए पर जुर्माने और ब्याज की समीक्षा करने और गैर-मुख्य वस्तुओं के कुछ घटकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने कहा कि समायोजित सकल राजस्व की गणना करते समय शामिल होना चाहिए।
याचिका में टेलीकॉम कंपनियों ने उनपर लगाई गई पेनल्टी और ब्याज में छूट देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को आदेश देते हुए एजीआर मामले में 92,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था।

आपको बता दें कि दूरसंचार ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया ने एजीआर के चलते 30 सितंबर को समाप्त दूसरी तिमाही में 50,921 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नुकसान दर्ज किया। यह किसी भी भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा क्वाटर्ली नुकसान है। पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 4,874 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
तो वहीं नतीजों के बाद कंपनी ने अपने आप को बाजार में बनाए रखने पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि अब वह सरकार की राहत पर निर्भर है। वोडाफोन आइडिया पर एजीआर का लगभग 39,000 कोरोड रुपए बकाया है।
बता दें कि इस तिमाही एयरटेल को भी झटका लगा था। नतीजों के मुताबिक एयरटेल को जुलाई-सितंबर, 2019 तिमाही में 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी को 119 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। एयरटेल को भी AGR की वजह से इस तिमाही में इतना नुकसान हुआ है। उसे एजीआर के कुल 28,450 करोड़ रुपये चुकाने हैं।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट का एजीआर पर पिछले महीने 24 अक्टूबर को फैसला आया था।
सरकार का पक्ष यह था कि टेलीकॉम कंपनियों की सालाना एजीआर की गणना करने में गैर-टेलीकॉम कारोबार से होने वाली आय को भी जोड़ा जाए। कोर्ट ने सरकार के पक्ष को मंजूरी दी थी।
सालाना एजीआर के ही एक हिस्से का भुगतान टेलीकॉम कंपनी लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में करती है। इस फैसले का सबसे बुरा असर वोडाफोन इंडिया लिमिटेड पर पड़ा।


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