नयी दिल्ली। कृषि सेक्टर में भारत का जलवा बरकरार है। कोरोनावायरस और लॉकडाउन के बावजूद भारत ने कृषि सेक्टर के निर्यात में अच्छा खासा प्रदर्शन किया है। कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी के बीच मार्च से जून के दौरान भारत का कृषि निर्यात 23.24 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 25,552.7 करोड़ रु रहा। देश के निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे एक खास वजह है। दरअसल कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक "एक्शन प्लान" तैयार किया गया है, जिसके तहत 'एक्सपोर्ट प्रमोशन प्लेटफॉर्म' बनाए जा रहे हैं और मौजूदा कृषि-समूहों (Agri-Clusters) को मजबूत किया जा रहा है। इस बात का खुलासा मंत्रालय ने एक बयान में किया है। साथ ही कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ जगहों की पहचान की जा रही है।
आत्मनिर्भर भारत के अहम है कृषि निर्यात
कृषि मंत्रालय ने कहा कि न केवल देश के लिए जरूरी विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए बल्कि एक आत्मानिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी कृषि निर्यात को बढ़ावा देना बेहद महत्वपूर्ण है। आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर कृषि महत्वपूर्ण है। यहां तक कि महामारी के चलते लॉकडाउन के कठिन समय में भी भारत ने विश्व फूड सप्लाई चेन को परेशान न करने का ध्यान रखा और निर्यात करना जारी रखा। मार्च-जून 2020 के दौरान कृषि-वस्तुओं का निर्यात 23.24 प्रतिशत बढ़कर 25,552.7 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 20,734.8 करोड़ रुपये था।
भारत का गेहूं उत्पादन में दूसरा नंबर
भारत दुनिया के गेहूं उत्पादन में दूसरी रैंक रखता है, लेकिन निर्यात में 34वें स्थान पर है। इसी तरह दुनिया में सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद भारत की निर्यात रैंकिंग 14वीं है। फलों के लिए भी यही स्थिति है, जहां भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन निर्यात रैंक 23वें स्थान पर है। मंत्रालय के अनुसार स्पष्ट और सक्रिय हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं कि भारत उत्पादन के साथ कृषि क्षेत्र में एक टॉप निर्यातक राष्ट्र बने। कृषि व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक्शन प्लान पर रोशनी डालते हुए मंत्रालय ने कहा कि कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उत्पाद विशिष्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन फॉरम्स (ईपीएफ) बनाए गए हैं।
इन उतपादों के लिए बने ईपीएफ
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के तहत आठ कृषि और संबद्ध उत्पादों (जिनमें अंगूर, आम, केला, प्याज, चावल, अनाज, अनार और फूल) की खेती के लिए ईपीएफ तैयार किए गए हैं। हर ईपीएफ में संबंधित प्रोडक्ट के निर्यातक होंगे। एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी वेलनेस फूड, हेल्थ कॉन्शियस फूड और न्यूट्रास्युटिकल्स और नए विदेशी बाजारों में पैठ बनाने में मदद करने के लिए 'ब्रांड इंडिया' को डेवलप करने पर केंद्रित है। बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए खाड़ी देशों की पहचान की गई है जो भारत के लिए एक मजबूत बाजार है। हालांकि वर्तमान में भारत उनके कुल आयात का केवल 10-12 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा करता है।
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