बढ़ते कोरोना के बीच महंगाई भी अपने उच्चतम स्तर पर है। वैसे तो हर साल बरसात का सीजन शुरू होने के साथ ही फल सब्जियों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
नई दिल्ली: बढ़ते कोरोना के बीच महंगाई भी अपने उच्चतम स्तर पर है। वैसे तो हर साल बरसात का सीजन शुरू होने के साथ ही फल सब्जियों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलती है। लेकिन इस बार तो टमाटर सबसे लाल हुआ है। एक महीने पहले करीब 20 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर आज 80 रुपये के पार पहुंच गया है। टमाटर के बाद अब आलू पर भी आफात आ गई। आलू के दामों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल गई।


खुदरा बाजार में टमाटर हुई लाल
बाजार में हरी सब्जियां पहले से ही उंचे दाम पर बिक रही हैं। आलू के थोक दाम में इस महीने चार रुपये प्रति किलो जबकि खुदरा दाम में 10 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हो गया है। खुदरा बाजार में टमाटर पहले से ही 70-80 रुपये किलो बिक रहा है। घिया, तोरई, भिंडी समेत तमाम हरी सब्जियां महंगी हो गई हैं। लेकिन गौर करने की बात यह है कि सब्जियों की इस महंगाई का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। यहां तक कि सब्जी कारोबारियों का भी कहना है कि सब्जियां महंगी होने से उनको नुकसान हो रहा है।
थोक मंडी से ही महंगे भाव में आ रही सब्जियां
बता दें कि ग्रेटर नोएडा में ठेली लगाकर सब्जी बेचने वाली का कहना है कि थोक मंडी से ही महंगे भाव पर सब्जियां आ रही हैं, इसलिए उनको उंचे दाम पर बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दाम बढ़ने के बाद लोग हरी सब्जियां भी कम खरीदने लगे हैं जिसके कारण बची हुई सब्जियां खराब हो जाती हैं और उनको नुकसान झेलना पड़ता है। वहीं एक उपभोक्ता ने बताया कि कोरोना काल में काम-काज नहीं होने से लोगों की आमदनी पहले से ही घट गई है, वहां अब सब्जियों के भी दाम बढ़ जाने से रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
इन वजहों से बढ़ रही महंगाई
वहीं दूसरी तरफ बता दें कि सब्जियों की महंगाई की दो वजहें बताई जा रही हैं। पहली यह है डीजल की कीमत बढ़ने से मालभाड़ा बढ़ गया है, जिससे सब्जियों की परिवहन लागत ज्यादा होने से दाम में इजाफा हुआ है। आलू और टमाटर की कीमतों में वृद्धि की यह एक बड़ी वजह है। वहीं दूसरी ओर बरसात के कारण सब्जियां ज्यादा खराब होती है जिसका असर कीमतों पर पड़ता है। वहीं, नई फसल अभी तैयार नहीं हुई जबकि पुरानी फसल से सब्जियों की पैदावार कम होने लगी है, जिससे आवक पर भी असर पड़ा है।
वहीं दूसरी ओर ग्रेटर नोएडा के एक किसान ने बताया कि बरसात के सीजन में पुरानी फसल से सब्जियों की पैदावार कम होने लगी है। उन्होंने कहा कि बैगन, लोबिया, कद्दू, घिया, तोरई, भिंडी की कुछ दिन पहले जितनी पैदावार होती थी उतनी अब नहीं हो रही है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में गुरुवार को आलू का थोक भाव आठ रुपये 28 रुपये प्रति किलो था जबकि एक जुलाई को मंडी में आलू का भाव आठ से 22 रुपये प्रति किलो था। प्याज का थोक भाव भी एक जुलाई को जहां 4.50 रुपये-12.50 रुपये प्रति किलो था वहां गुरुवार को बढ़कर छह रुपये से 13.50 रुपये प्रति किलो हो गया। जानकारी दें कि चैंबर ऑफ आजादपुर फ्रूट्स एंड वेजीटेबल्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट एम. आर. कृपलानी बताते हैं कि डीजल की कीमतों में वृद्धि होने से सब्जियों और फलों के परिवहन की लागत बढ़ गई है जिसका असर कीमतों में देखा जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को हरी सब्जियों के दाम
- आलू-30 से 35
- गोभी-80
- टमाटर-70-80
- प्याज-20-30
- लौकी/घिया-30
- भिंडी-30-40
- खीरा-40-50
- कद्दू-30
- बैगन-40
- शिमला मिर्च-80
- तोरई-30-40
- करैला-40-50
- परवल-70
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