Currency Crisis : पाकिस्तान और श्रीलंका करेंसी संकट का सामना कर रहे हैं। अब तीन और देशों के सामने यही संकट गहरा गया है। नोमुरा होल्डिंग्स इंक के अनुसार चेक गणराज्य, रोमानिया और हंगरी एक्सचेंज रेट संकट के जोखिम का सामना कर रहे हैं। ये संकट इन देशों के सामने अगले एक साल में आ सकता है। नोमुरा ने इसके पीछे राजकोषीय और बाहरी चुनौतियां बढ़ने का कारण बताया है।

किस आधार पर दी चेतावनी
नोमुरा के डैमोकल्स इंडेक्स के अनुसार, यह चेतावनी एफएक्स रिजर्व इंपोर्ट कवर, रियल शॉर्ट टर्म ब्याज दरों, साथ ही राजकोषीय और चालू खाता उपायों सहित आठ इंडिकेटर्स के एनालिसिस पर आधारित है। इसने करेंसी संकट के लिए 32 इमर्जिंग मार्केट्स की कमजोरी का आकलन किया था।
ये देश पहले से संकेट में
नोमुरा के विश्लेषकों रॉब सुब्बारमन और सी यिंग तोह ने सोमवार को एक रिपोर्ट में लिखा कि मिस्र, श्रीलंका, तुर्कीये और पाकिस्तान पहले ही इस संकट का सामना कर चुके हैं लेकिन अभी तक संकट से बाहर नहीं निकले हैं।

हंगरी की हालत खराब
चेक गणराज्य, रोमानिया और हंगरी तीनों ही यूरोपीय देश हैं। यूरोपीय संघ से रिकवरी फंडिंग में रोक के बाद हंगरी की करेंसी फ़ोरिंट इस साल सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली इमर्जिंग मार्केट्स करेंसियों में से एक है। रोमानिया और चेक गणराज्य की मुद्राओं में भी डॉलर के मुकाबले 8 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। इमर्जिंग मार्केट्स करेंसियों में संकट अब दो दशकों से अधिक समय में सबसे अधिक है और बढ़ते व्यापक-आधारित जोखिमों की चेतावनी दे रही है। बता दें कि यूरोजोन में पिछले साल से महंगाई में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वहां 34 करोड़ से अधिक लोगों का जीवनयापन लागत में इजाफा हुआ है।

क्या है करेंसी संकट
करेंसी संकट एक प्रकार का वित्तीय संकट ही है। इसे वास्तविक आर्थिक संकट से जोड़ा जाता है। करेंसी संकट बैंकिंग संकट या डिफ़ॉल्ट संकट की संभावना को बढ़ाता है। करेंसी संकट के दौरान विदेशी कर्ज की वैल्यू घरेलू करेंसी की घटते वैल्यू के सापेक्ष काफी बढ़ जाता है। करेंसी संकट पुराने भुगतान संतुलन घाटे का परिणाम माना जाता है, और इस प्रकार इसे भुगतान संतुलन संकट भी कहा जाता है। अक्सर ऐसा संकट करेंसी में डीवैल्यूएशन का कारण बनता है। बैंकिंग या डिफ़ॉल्ट संकट से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए, एक केंद्रीय बैंक करेंसी जारी करने में वृद्धि करेगा, जो एक निश्चित विनिमय दर के टूटने पर रिजर्व को कम कर सकता है। मुद्रा, बैंकिंग, और डिफॉल्ट संकटों के बीच संबंध दोहरे या तिगुने संकटों की संभावना को बढ़ाता है।
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