Adani-Hindenburg Case: सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले में अडानी ग्रुप की तरफ से स्टॉक मूल्य में हेरफेर के आरोपों की जांच विशेष जांच दल या सीबीआई को ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि समीक्षा याचिका पर गौर करने के बाद रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से कोई गलती नहीं है। आइए इस मामले के बारे में आपको बताते हैं।

समीक्षा याचिका में किया गया था ये दावा
समीक्षा याचिका में दावा किया गया था कि इस फैसले में गलतियां थीं और याचिकाकर्ता के वकील को हासिल कुछ नई सामग्री के आलोक में फैसले की समीक्षा के लिए पर्याप्त कारण थे।
याचिका में कहा गया था कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में न्यायालय को केवल आरोपों के बाद की गई 24 जांच की स्थिति के बारे में सूचित किया था, लेकिन उसने इनके पूरा होने या अधूरे होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सेबी ने उन 24 मामलों में से 22 में अपनी जांच पूरी कर ली है, जहां अडानी समूह के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।
इस याचिका को किया गया खारिज
पीठ ने पांच मई के अपने आदेश में कहा कि समीक्षा याचिका पर गौर करने के बाद रिकॉर्ड में कोई त्रुटि नहीं दिखाई देती है। उच्चतम न्यायालय नियम 2013 के आदेश 47 नियम एक के तहत समीक्षा का कोई मामला नहीं बनता है। लिहाजा समीक्षा याचिका खारिज की जाती है।'
इस याचिका पर न्यायाधीशों ने चैंबर में विचार किया है और इसके पहले इस साल तीन जनवरी को शीर्ष अदालत ने शेयर कीमतों में हेराफेरी के आरोपों की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) आरोपों की 'व्यापक जांच' कर रहा है और इसका आचरण भरोसा जगाता है।
अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी
हिंडनबर्ग रिसर्च की तरफ से धोखाधड़ी वाले लेनदेन और शेयर कीमतों में हेराफेरी सहित कई आरोप लगाए जाने के बाद अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी।


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