Adani Group : प्रमोटरों ने 3 कंपनियों में बेची विदेशी निवेशकों को हिस्सेदारी

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Adani Group : एस.बी. अदानी फैमिली ट्रस्ट ने आज ओपन मार्केट के जरिए अडानी समूह की 3 कंपनियों के 17.2 करोड़ शेयर बेचे हैं। ट्रस्ट, जो प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा है, ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी ट्रांसमिशन में हिस्सेदारी बेची। अमेरिका के जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी ग्रुप की कंपनियों (अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी ट्रांसमिशन और अडानी एंटरप्राइजेज में सेकंडरी ब्लॉक ट्रेड ट्रांजेक्शन की एक सीरीज में 15,446 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

वैश्विक निवेशकों का भरोसा
इस डील पर अडानी समूह के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने कहा हम जीक्यूजी के साथ इस ऐतिहासिक लेन-देन को पूरा करने पर काफी खुश हैं। हम अपने इंफ्रा और सस्टेनेबल एनर्जी, रसद और एनर्जी ट्रांजिशन के यूटीलिटी पोर्टफोलियो में एक निवेशक के रूप में जीक्यूजी की भूमिका को महत्व देते हैं। यह लेनदेन गवर्नेंस, मैनेजमेंट प्रेक्टिसेज में वैश्विक निवेशकों के निरंतर विश्वास को दर्शाता है।

अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों की डील
जीक्यूजी द्वारा अडानी एंटरप्राइजेज में की गयी डील 5,460 करोड़ रुपये की रही, क्योंकि शेयरों में लेन-देन 1,410.86 रुपये की कीमत पर हुई। अडानी पोर्ट्स के शेयरों को 596.20 रुपये की कीमत पर खरीदा गया और इसके टोटल शेयरों की कीमत 5,282 करोड़ रुपये रही। अडानी ट्रांसमिशन के मामले में 1,898 करोड़ रुपए का सौदा 668.4 रुपए प्रति शेयर के भाव पर हुआ था। अडानी ग्रीन एनर्जी के मामले में, लेनदेन 504.6 रुपये के शेयर मूल्य पर लगभग 2,806 करोड़ रुपये की रही। अडानी समूह ने कहा कि इस निवेश ने जीक्यूजी को महत्वपूर्ण भारतीय इंफ्रा के विकास और ग्रोथ में एक प्रमुख निवेशक बना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट से झटका
हालांकि दूसरी ओर अडानी ग्रुप की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब समूह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मार्केट रेगुलेटर सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) को अडानी-हिंडनबर्ग मामले में जांच पूरी करने को कहा है। कोर्ट का आदेश है कि जांच पूरी करके दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए। आपको बता दें कि सेबी पहले से ही हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडानी समूह पर लगे आरोपों की जांच कर रही है। पर अब चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा है कि मामले के अलग-अलग बाकी पहलुओं की जांच रेगुलेटरी बॉडी को करनी चाहिए।

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