
Adani Group : अडानी ग्रुप की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब समूह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मार्केट रेगुलेटर सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) को अडानी-हिंडनबर्ग मामले में जांच पूरी करने को कहा है। कोर्ट का आदेश है कि जांच पूरी करके दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए। आपको बता दें कि सेबी पहले से ही हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडानी समूह पर लगे आरोपों की जांच कर रही है। पर अब चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा है कि मामले के अलग-अलग बाकी पहलुओं की जांच रेगुलेटरी बॉडी को करनी चाहिए।
स्टॉक प्राइसिंग के उल्लंघन और हेरफेर की होगी जांच
एससी ने कहा है कि सेबी को जांच करनी है कि क्या स्टॉक प्राइसिंग का उल्लंघन और हेरफेर हुआ है। शीर्ष अदालत ने शेयर बाजार के रेगुलेटरी मैकेनिज्म के मौजूदा फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन भी किया है। इस समिति में रिटायर हो चुके न्यायमूर्ति एएम सप्रे को समिति का प्रमुख बनाया गया है। साथ ही कई अन्य लोगों को इस समिति में शामिल किया गया है, जिनमें ओपी भट्ट, न्यायमूर्ति केपी देवदत्त, केवी कामत, नंदन नीलेकणि और सोमशेखर सुंदरसन शामिल हैं।
क्या जांच करेगी सेबी
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी समूह की मौजूदा जांच में पाया कि सेबी ने प्रतिभूति अनुबंध विनियम नियम 1957 के कथित उल्लंघन की जांच का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया है, जो एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी में न्यूनतम शेयरहोल्डिंग बनाए रखने का प्रावधान करता है। इसलिए बेंच ने आदेश दिया है कि चल रही जांच में कुछ और चीजों को शामिल किया जाए।
- जांच होगी कि क्या सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन रूल्स के नियम 19(ए) का उल्लंघन हुआ है?
क्या संबंधित पार्टियों को लेन-देन और अन्य जरूरी जानकारी नहीं दी गयी है, जो कानून के अनुसार सेबी से जुड़े पक्षों से संबंधित है?
- क्या मौजूदा कानूनों के उल्लंघन में स्टॉक की कीमतों में कोई हेराफेरी की गई थी?
- मामले में सेबी तेजी से दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। अदालत के अनुसार इन नये निर्देशों से चल रही जांच को किीस तरह सीमित नहीं किया जाएगा।
एक्सपर्ट पैनल क्या करेगा
- हाल ही में सिक्योरिटी बाजार में अस्थिरता के कारणों और फैक्टरों का पता लगाने सहित स्टेटस का ऑवरऑल एसेसमेंट करेगा।
- निवेशकों के बीच जागरूकता को बढ़ाने के उपायों का सुझाव देगा।
- जांच करेगा कि अडानी समूह और अन्य कंपनियों के मामले में सिक्योरिटी बाजार के कानूनों के कथित उल्लंघन से निपटने में नियामकीय स्तर पर विफलता तो नहीं है।
- निवेशकों की सुरक्षा के लिए वैधानिक और नियामक फ्रेमवर्क को मजबूत करने और मौजूदा फ्रेमवर्क को ठीक से लागू करने को सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएगा।
अदालत ने सेबी चेयरपर्सन से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि समिति को सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाए। फाइनेंशियल रेगुलेशन से जुड़ी एजेंसियों, फाइनेंशियल एजेंसियों और लॉ एंफॉर्समेंट एजेंसियों सहित केंद्र सरकार की सभी एजेंसियों को इस समिति के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया है। ये समिति बाहरी एक्सपर्ट की मदद लेने के लिए भी आजाद होगी।
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