Adani Group: दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूवेबल एनर्जी हब कर रहा तैयार

Adani Group's big plan: अदानी समूह गुजरात के मुंद्रा में दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण केंद्र बनाने जा रहा है। जिसमें पॉलीसिलिकॉन, वेफर्स, सेल, सौर मॉड्यूल और यहां तक कि पवन ऊर्जा सहित ग्रीन ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं में जाने वाली लगभग सभी चीजों की उत्पादन इकाइयां होंगी। इस बात की जानकारी अदानी सोलर के वरिष्ठ अधिकारियों ने दी है।

इसके अलावा, अदानी समूह उत्पादन में आवश्यक सभी सहायक उपकरणों का निर्माण भी मुंद्रा पर ही करने जा रहा है। कंपनी जिन सहायक वस्तुओं के लिए उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही है, उनमें ग्लास, एथिलीन विनाइल एसीटेट (ईवीए) फिल्में, बैकशीट और एल्यूमीनियम फ्रेम शामिल हैं, जिनका उपयोग सौर पैनलों में किया जाता है।

Adani Groups big plan

अडानी सोलर के बिक्री और विपणन प्रमुख राहुल भूटियानी के अनुसार यह दुनिया का पहला और एकमात्र सबसे अच्छा सौर विनिर्माण केन्द्र होगा। इसके अलावा, हमारी सहयोगी कंपनी अदाणी विंड भी मुंद्रा में ही अपनी पवन टरबाइन विनिर्माण क्षमता को मौजूदा 1.5 गीगावॉट से बढ़ाकर 5 गीगावॉट तक करने जा रही है। इन्होंने बताया कि यहां तक कि चीन में भी एक ही स्थान पर सभी सहायक उपकरणों और पूरी तरह से एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का विनिर्माण नहीं होता है।

चीन में 20 से लेकर 40 गीगावॉट या उससे भी अधिक की बड़ी सौर विनिर्माण क्षमता हो सकती है, लेकिन वह विनिर्माण इकाइयां, आपूर्ति श्रृंखला के केवल एक हिस्से पर केंद्रित है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी चीन में वेफर्स बना रही है, तो वह केवल 100 गीगावॉट वेफर्स बनाएगी। इसी तरह एक अन्य कंपनी अकेले 50 गीगावॉट पॉलीसिलिकॉन का निर्माण करेगी और एक तीसरी कंपनी 50 गीगावॉट सेल का निर्माण करेगी। चीन के पास विनिर्माण का पैमाना है, लेकिन भौगोलिक रूप से एक ही कंपनी के अंतर्गत स्थित एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव है।

जब भूटियानी से एक ही स्थान पर सभी नवीकरणीय ऊर्जा सामग्रियों के विनिर्माण के पूर्ण एकीकरण का कारण पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन तेज और सस्ता हो जाएगा।

उनके अनुसार अगर हमारे पास सौर मॉड्यूल के लिए ग्लास जैसी सहायक वस्तुएं एक ही स्थान पर उत्पादित की जा रही हैं, तो इससे परिवहन लागत काफी कम हो जाती है। हमारे पास मुंद्रा बिजली संयंत्र है, इसलिए बिजली कोई समस्या नहीं है। ध्यान रखें, पॉलीसिलिकॉन, सिल्लियां और वेफर निर्माण के लिए बहुत अधिक बिजली की आवश्यकता होती है। फिर हमारे पास मुंद्रा बंदरगाह है, जिसे अदानी समूह द्वारा संचालित किया जाता है। इसका भी फायदा मिलेगा।

विनिर्माण इकाइयों और बंदरगाह एक साथ होने से उत्पादों का निर्यात करना भी आसान हो जाता है। अदानी समूह की सौर मॉड्यूल की स्थापित क्षमता वर्तमान में 4 गीगावॉट है और यह इस वर्ष लगभग 3.8 गीगावॉट का उत्पादन करेगी। इसमें से इसका निर्यात 3 से लेकर 3.1 गीगावॉट तक होगा, जबकि शेष घरेलू बाजार में बेचा जाएगा।

अदानी समूह 2027 तक प्रत्येक पॉलीसिलिकॉन, वेफर्स, सेल और सौर मॉड्यूल की 10 गीगावॉट की विनिर्माण क्षमता स्थापित करने जा रहा है। इसे अदानी सोलर की तरफ से स्थापित किया जाएगा। मुंद्रा में समूह की वर्तमान कुल विनिर्माण क्षमता 4 गीगावॉट सौर मॉड्यूल, 4 गीगावॉट सेल और 2 गीगावॉट वेफर्स है। जबकि इन्हें चरणबद्ध तरीके से सभी को 10 गीगावॉट तक किया जाएगा।

अदानी ग्रुप इस योजना पर करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। कंपनी ने बताया है कि इस योजना के लिए आरईसी और पीएफसी से कर्ज को लेकर बात हो गई है। इसके अलावा कंपनी के प्रमोटर भी फंडिंग करेंगे। इसके अलावा कंपनी आंतरिक स्तर पर भी फंड जुटाएगी।

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