
Adani Enterprises FPO : अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) लाने जा रही है। ये भारत का सबसे बड़ा एफपीओ बनने जा रहा है। इस एफपीओ में शेयरों की बिक्री पर 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट पेश की जाएगी। इस छूट से अडानी एंटरप्राइजेज निवेशकों के बड़े वर्ग को लुभाने की कोशिश करेगी। ऐसे में ये रिटेल निवेशकों के लिए कमाई का शानदार मौका होगा, क्योंकि उन्हें भारी छूट पर ऐसे ही शेयर मिल जाएंगे।
किस रेट पर बिकेंगे शेयर
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से जारी की गयी जानकारी के अनुसार 3,112 रुपये से 3,276 रुपये के प्राइस बैंड में शेयर बेचकर कंपनी 2.5 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश करेगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार बड़े निवेशकों को मौजूदा बाजार मूल्य पर 10 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा, जबकि रिटेल निवेशकों और भी कम कीमत पर शेयर मिलेंगे। अडानी एंटरप्राइजेज की मार्केट वैल्यू पिछले एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है।
क्या करेगी कंपनी पैसों का
एफपीओ से आने वाले पैसों में से लगभग आधा अडानी के हवाईअड्डे और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए खर्च किया जाएगा, जबकि करीब 42 अरब रुपये, जो कि जुटाई गई राशि के एक चौथाई से थोड़ा कम होंगे, का उपयोग कर्ज को कम करने के लिए किया जाएगा। ये जानकारी कंपनी ने बुधवार को अपने प्रॉस्पेक्टस में दी थी। एंकर निवेशक 25 जनवरी को और बाकी निवेशक 27 जनवरी से 31 जनवरी तक शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
किश्तों में कर सकेंगे पेमेंट
शेयरों की फॉलो ऑन सेल के लिए एक दुर्लभ कदम के तहत एशिया के सबसे अमीर आदमी की फर्म निवेशकों को उनके द्वारा खरीदे शेयरों के लिए किश्तों में भुगतान करने की अनुमति देगी। निवेशकों को ऑफर प्राइस का 50 प्रतिशत एडवांस भुगतान के रूप में देना होगा, उसके बाद बाकी राशि को एक या दो किश्तें दिया जा सकेगा। रिटेल निवेशकों को प्रति शेयर 64 रुपये की छूट मिलेगी।
कई टार्गेट होंगे पूरे
इतने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री से अडानी ग्रुप को कई टार्गेट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी। अपने निवेशक आधार का विस्तार करने से ये उन आरोपों से बचाव करेगा कि उनके समूह में मुख्य रूप से कम कारोबार वाले स्टॉक शामिल हैं, लोन चुकाने से ओवरलेवेरेज की चिंताओं का समाधान होगा और निवेशकों के बीच अडानी की विरासत एक मनी क्रिएटर के रूप में मजबूत होगी।
क्या होता है एफपीओ
जब कोई कंपनी शेयर बाजार में अपना शेयर लिस्ट कराना चाहती है तो उसे पहले आईपीओ लाना होता है। आईपीओ के जरिए पहली बार कंपनी पब्लिक को शेयर बेचती है। लिस्ट होने के बाद अगर कोई कंपनी इसी तरह का पब्लिक ऑफर फिर से लाना चाहे यानी पब्लिक को शेयर बेचना चाहे तो उसे एफपीओ यानी फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर लाना होता है। एफपीओ वो प्रोसेस है जिसके जरिए एक कंपनी, जो पहले से ही एक एक्सचेंज पर लिस्टेड है, निवेशकों या मौजूदा शेयरधारकों, आमतौर पर प्रमोटरों को नए शेयर जारी करती है। एफपीओ का उपयोग कंपनियां अपने इक्विटी बेस में विविधता लाने के लिए करती हैं।
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