
53 lakh investors have left the stock market: बीते नौ माह में शेयर बाजार से करीब 53 लाख एक्टिव निवेशक कम हो चुके हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की तरफ से जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है।
वहीं अगर आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हर माह ढेर सारे नए डीमैट अकाउंट खोले जा रहे हैं। लेकिन वहीं पर पुराने डीमैट खाताधारक ट्रेडिंग में लौटते नजर नहीं आ रहे हैं।
अगर एनएसई की तरफ से जारी आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बीते 9 माह से एक्टिव ट्रेडर में लगातार कमी आ रही है। जहां जून 2022 में एक्टिव ट्रेडर 3.8 करोड़ थे, वहीं मार्च 2023 में एक्टिव ट्रेडर 3.27 करोड़ बचे हैं।
जानकारों के अनुसार इसके कई कारण माने जा रहे हैं। लेकिन में से एक बड़ा कारण घर से काम करने का मौका (वर्क फ्रॉम होम) कम होता जाना भी है।
वहीं अगर रिटेल निवेशकों की तरफ से निवेश के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह भी बहुत कुछ कह रहे हैं। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में 1.65 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2020-21 में 68,400 करोड़ रुपये का निवेश रिटेल निवेशकों की तरफ से आया था। वहीं यह निवेश वित्त वर्ष 23 में कम होकर 3 वर्षों में सबसे कम 49,200 करोड़ रुपये पर आ गया।

इसके अलावा, बीएसई और एनएसई पर रिटेल निवेशकों का औसत दैनिक कारोबार मार्च 2023 में सालाना आधार पर 29 फीसदी कम होकर 23,700 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, नए डीमैट खाते जोड़ने की गति भी धीमी हो रही है। जोड़े गए नए डीमैट खातों की बढ़ने का महीने-दर-महीने औसत 8 फीसदी गिरा है।

शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले डेढ़ साल में निफ्टी की साइडवेज-टू-डाउनट्रेंड मूवमेंट के चलते कमजोर निवेशकों को धीरे-धीरे स्टॉक मार्केट से बाहर कर रही है। लॉकडाउन के दौरान वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति से युवाओं के बीच शेयर बाजार तेजी से बढ़ा था। इसका एक कारण घर पर काम के दौरान आसानी से शेयर बाजार में आर्डर लगाए और काटे जा सकते थे, जो ऑफिस में संभव नहीं है।


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