
America is still a financial power: विश्व का आर्थिक परिदृश्य लगातार बदल रहा है। लेकिन एक बात नहीं बदल रही है कि अमेरिका अभी भी दुनिया की आर्थिक शक्ति बना हुआ है। इस बात को एक चार्ट के माध्यम से देश के जाने माने कारोबारी उदय कोटक ने समझाया है।
उदय कोटक ने आज एक चार्ट ट्वीट किया है, जिसमें मार्केट कैप के आधार पर दुनिया की टॉप 10 कंपनियों को दिखाया गया है। इसमें किसी भी यूरोपीय, चीनी या भारतीय कंपनी का नाम नहीं है। इस सूची में शामिल 10 कंपनियों में से 9 अमेरिकी हैं। उदय कोटक के अनुसार ऐसे में लगता है कि आर्थिक रूप अमेरिका के कमजोर होने की भविष्यवाणी शायद समय से पहले कर दी गइ है।
इस चार्ट में दी गई टॉप 10 कंपनियां इस प्रकार से हैं
एप्पल : 2.598 ट्रिलियन डालर
माइक्रोसॉफ्ट : 2.132 ट्रिलियन डालर
अरामको : 2.032 ट्रिलियन डालर
अल्फाबेट : 1.349 ट्रिलियन डालर
अमेजन : 1.043 ट्रिलियन डालर
बर्कशायर हैथवे : 711.10 बिलियन डालर
एनवीआईडीआईए : 655.48 बिलियन डालर
टेस्ला : 580.11 बिलियन डालर
मेटा : 564.65 बिलियन डालर
जॉनसन एंड जॉनसन : 516.05 बिलियन डालर
मार्केट कैप के लिहाज से दुनिया की टॉप 10 कंपनियों में से 9 अमेरिकी हैं और एक सऊदी है। अमेरिकी कंपनियों के इस वर्चस्व से पता चलता है कि अमेरिका अभी भी ग्लोबल अर्थव्यवस्था में एक बड़ा और महत्वपूर्ण देश है।

ऐसे में अमेरिकी के कमजोर पड़ने की चर्चा सही नहीं लगती है। हां यह बात जरूर है कि बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण अमेरिका का आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव कम हो रहा है। वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि चीन और भारत जैसे अन्य ग्लोबल खिलाड़ियों के उदय को देखते हुए अमेरिका की गिरावट अपरिहार्य है। हालाँकि, दुनिया की टॉप 10 कंपनियों की लिस्ट ऐसा नहीं बताती है।
हां यह बात ठीक है कि अमेरिकी कंपनियां वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हावी हैं। वोक्सवैगन और नेस्ले जैसी यूरोपीय कंपनियां, अलीबाबा और टेनसेंट जैसी चीनी कंपनियां, और रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसी भारतीय कंपनियां सभी अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। लेकिन इन सभी को अमेरिकी कंपनियों जैसा होने में अभी काफी समय लग सकता है।


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