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भारत में ही तैयार होंगे चीन से आने वाले 666 सामान, ड्रैगन को होगा नुकसान

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नयी दिल्ली। चीन से आयात किए जाने वाने 666 सामानों का भारत में ही प्रोडक्शन किए जाने की तैयारी है। इन सामानों में बिजली के लैंप, लकड़ी का फर्नीचर, ट्राईसाइकिल्स और स्की-बूट जैसी चीजें शामिल हैं। भारतीय सूक्ष्म और लघु और मध्यम उद्यम संघ (एफआईएसएमई) के अनुसार इन चीजों को स्थानीय स्तर पर ही प्रोडक्शन किया जा सकता है और इससे भारत को चीन के साथ अपना व्यापार घाटा सालाना 10 अरब डॉलर तक करने में मदद मिलेगी। वाणिज्य मंत्रालय ने एफआईएसएमई को उन उत्पादों का पता लगाने के लिए निर्देश दिया था जहां चीन पर आयात निर्भरता कम की जा सकती है। एफआईएसएमई के सेक्रेटरी जनरल अनिल भारद्वाज के अनुसार 600 से अधिक ऐसी वस्तुओं की पहचान की गई है जिनका एमएसएमई द्वारा आयात मुख्य रूप से चीन से किया जाता है। इन वस्तुओं के आयात पर लगने वाला शुल्क भी बढ़ाया जा सकता है।

ज्यादा मुश्किल नहीं प्रोडक्शन
 

ज्यादा मुश्किल नहीं प्रोडक्शन

जिन चीजों का चीन से आयात रोकने पर विचार किया जा रहा है उनमें से अधिकांश उत्पाद ऐसे हैं, जिनके स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन के लिए ज्यादा तकनीकी कौशल की जरूरत नहीं होती है। इनसे स्थानीय फर्मों की लागत में भी बहुत अधिक वृद्धि नहीं होगी। हालांकि एफआईएसएमई इन उत्पादों के आयात पर शुल्क बढ़ाए जाने से पहले उसके प्रभाव के बारे में पूरी तरह से अध्ययन और परीक्षा करना चाहता है। वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले महीने सीआईआई, फिक्की, और एसोचैम सहित कई उद्योग निकायों को चीन से आयात किए जाने वाले सामानों पर अपने इनपुट देने के लिए कहा था। इस कदम का उद्देश्य विभिन्न वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाकर चीन पर शिकंजा कसना था।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देना है मकसद

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देना है मकसद

वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है। उनके मुताबिक इसके लिए अनावश्यक आयातों में कटौती और प्रोत्साहन का सहारा लिया जाता है। गैर-प्रतिस्पर्धी आयात हैं जहां भारतीय उद्योग मजबूत नहीं हैं। सरकार भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने के लिए जो कदम उठा सकती है उनमें टैरिफ बढ़ाना, नॉन-टैरिफ उपाय और कई दूसरे कदम शामिल हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएससी) पर तनाव के बाद भारत में चीन के खिलाफ जनभावना मजबूत हुई है। कारोबार के मामले में भारत ने चीन को कई झटके दिए हैं। जेएसडब्ल्यू समूह जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स ने भी चीन से अपना आयात शून्य तक घटाने का ऐलान किया।

सीएआईटी ने की थी शुरुआत
 

सीएआईटी ने की थी शुरुआत

चीन के सीमा विवाद होने के फौरन बाद कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने मेड इन चाइना प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने को कहा था। सीएआईटी की तरफ से बकायदा 500 से अधिक चीनी प्रोडक्ट्स की लिस्ट भी जारी की गई थी, जिसमें खिलौने, कपड़े, वस्त्र, परिधान, रसोई के सामान, फर्नीचर, हार्डवेयर, जूते, हैंडबैग, लगेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मैटिक्स और गिफ्ट आइटम, घड़ियां, रत्न और आभूषण, स्टेशनरी, कागज, स्वास्थ्य उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल थे। सीमा विवाद के बाद चीन-भारत तनाव को देखते हुए सीएआईटी ने कहा था कि "चीन का रवैया देश (भारत) के हितों के खिलाफ है।

भारत ने चीन की और कसी नकेल, शुरू हुई हर सामान की जांच

English summary

666 items imported from China will be manufactured in India Dragon will bear damaged

666 goods imported from China are set to be produced in India. These items include such items as electric lamps, wooden furniture, tricycles and ski-boots.
Story first published: Tuesday, July 14, 2020, 18:59 [IST]
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