नई दिल्ली, अगस्त 09। पीएम मोदी ने कई मौको पर भारत को डिजिटल क्रांती से तेजी से जोड़ने पर बल दिया है। मोदी सरकार देश में 5जी की सुविधा जल्द ही शुरू करने की प्रक्रिया में है। 1 अगस्त को 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की प्रक्रिया समाप्त हुई है। नीलामी में सरकार ने अब तक की सबसे ज्यादा 1.5 करोड़ रुपये की कमाई की है। निलामी में 5जी स्पेक्ट्रम के लिए निवेशको में खासा उत्साह देखा गया।
5जी के स्पेक्ट्रम से क्या होगा फायदा
1- बताया जा रहा है कि 5जी तकनीक के बाद मोबाइल इंटरनेट की स्पीड 4जी नेटवर्क से 10 गुना ज्यादा हो जाएगी।
2- स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। 5जी के बाद टेलीमेडिसिन के साथ-साथ मेडिकल क्षेत्र में रोबोट का इस्तेमाल बढ़ेगा। दूर दराज के गांव में नेटवर्क सही होने से वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग से गंभीर बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की जा सकेगी।
3- होटल और हॉस्पिटालिटी सेक्टर में रोबोट तकनिकि का इस्तेमाल करना संभव हो आएगा।
4- वर्चुअल रियलिटी को बढ़ावा दिया जाएगा।
5- कृषि के क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल प्रभावी हो सकेगा। 5जी तकनिकी की मदद से मौसम संबंधित जानकारी का अंदाजा ज्यादा सटीकता से लगाया जा सकेगा।
6- शिक्षा और शोध के क्षेत्र में तेज इंटरनेट से सुविधा मिलेगी।
क्या देश में सस्ता है इंटरनेट?
युनाईटेड किंगडम की एक वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक सस्ते मोबाइल डाटा के रैकिंग में भारत दुनियाभर में 5वें स्थान पर है। इजरायल में दुनिया का सबसे सस्ता इंटरनेट सेवा मिलती है। इजरायल के बाद इटली, सैन मारिनो और फिजी सस्ते इंटरनेट के मामले में भारत आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अटलांटिक के एक द्वीप सेंट हेलेना में इंटरनेट सबसे महंगा बिकता है।
इंटरनेट से सरकार को कितनी हुई है कमाई
सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2012 में 2 जी स्पेक्ट्रम के नीलामी में सरकार ने 9,400 करोड़ रुपए, 2013 के नीलामी में 61,200 करोड़ रुपए और 2015 में हुए 2जी और 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी में 1.09 लाख करोड़ रुपए कमाई की थी। 2016 में हुए 2जी, 3जी 4जी स्पेक्ट्रम के नीलामी से सरकार ने 65,789.12 करोड़ रुपए, 2021 में हुई निलामी से 77,814 करोड़ रुपए कमाई थी। बात अगर 2020 में 2जी, 3जी, 4जी, 5जी स्पेक्ट्रम के नीलामी की करे तो इससे सरकार को 1.5 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई थी।
5जी के निलामी में हुई है तगड़ी कमाई
सरकार 5जी कुल 10 बैंड के 72,098 मेगाहर्ट्ज में से 51,236 मेगाहर्ट्ज 5जी स्पेक्ट्रम ही बेंच पाई है। यानी की सरकार ने अबतक केवल 71 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बेचा है। सात दिनों तक चली 5जी के नीलामी के समय कुल 1,50,173 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गई। सरकार पहले साल में स्पेक्ट्रम बेचने से 13,365 करोड़ रुपये की कमाई करेगी। 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी राशि पिछले साल बेचे गए 77,815 करोड़ रुपये के 4जी स्पेक्ट्रम से लगभग दोगुना है।
किस कंपनी ने कितना खर्च किया
5जी के स्पेक्ट्रम की नीलामी में रिलायंस जियो ने अकेले 88,078 करोड़ रुपये की बोली लगाई। सबसे बड़े बोली के साथ जियों ने नीलामी में बिके कुल स्पेक्ट्रम में से करीब आधा का अधिग्रहण किया। भारती एयरटेल ने 43,084 करोड़ रुपये खर्ज किए। एयरटेल को 19,867 मेगाहर्ट्ज का 5जी स्पेक्ट्रम मिला। बात अगर वोडाफोन आइडिया की करें तो इसने 18,784 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा। अडाणी समूह की कंपनी ने सबसे कम रुपये खर्च किए, कंपनी ने 212 करोड़ रुपये में 400 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदा है।


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