नई दिल्ली। चीन को झटके पर झटका मिल रहे हैं। भारत ने जहां चीन को 59 ऐप बंद कर बड़ा झटका दिया था, वहीं जापान ने चीन को इससे भी बड़ा झटका दिया है। कोरोना वायरस और चीन की विस्तारवादी नीतियों के कारण ही चीन को लगातार ऐसे झटके मिल रहे हैं। दूसरी तरफ दुनिया की बड़ी ताकतें चीन की सीमा पर अपनी सेनाएं भी तैनात कर रही हैं। ऐसे में देखा जाए तो चीन को चारो तरफ से न सिर्फ घेरा सख्त हो रहा है, बल्कि उसे अंदर से भी खोखला किया जा रहा है। आइये जानते हैं जापान ने कौन सा बड़ा झटका दिया है।
जापान की 57 कंपनियां चीन से निकल रहीं
चीन पर से भरोसा उठने के बाद वहां से कंपनियों का भागना जारी है। इसी क्रम में जापान की 57 कंपनियों ने एक साथ चीन छोड़ने का फैसला कर लिया है। इससे पहले ताईवान की कंपनियां भी ऐसा कर चुकी हैं। जापान ने चीन में कारोबार कर रहीं अपनी 57 कंपनियों को वापस अपने देश बुलाने का फैसला किया है। वहीं जापान ने कहा है कि वह कंपनियों के चीन से निकलने पर होने वाला खर्च भी वह ही उठाएगी।
निर्भरता घटाने की पहल शुरू
ब्लूमबर्ग के हवाले से मीडिया में आईं खबरों के अनुसार जापान ने चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया है। जापानी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला पर कोई दुष्परिणाम न पड़े और वे मुख्य रूप से चीन पर निर्भर न रहें इस उद्देश्य इन कंपनियों को वापस बुलाने का निर्णय जापान ने लिया है। जापान इस काम के लिए इन 57 कंपनियों को करीब 53.6 करोड़ डॉलर की सहायता देगा।
जापानी मीडिया ने भी दी जानकारी
जापान के निक्केई अखबार के मुताबिक सरकार सभी जापानी कंपनियों को स्वदेश में वापस लाने के लिए कुल 70 अरब येन खर्च करेगी। जापान का कहना है कि व्यापार के साथ ही चीन की विदेश नीति भी अच्छी नहीं है और यह सभी का सहयोग नहीं करने की है। आर्थिक रूप से परेशान करने के साथ ही अपने पड़ोसी देशों की सीमाओं का चीन कभी भी सम्मान नहीं करता है। यहाी कारण है कि सख्त फैसला किया जा रहा है।
और भी लग रहे हैं चीन को झटके
जापान ने इस समय अपने देश की कंपनियों को वापस बुलान शुरू किया है, जबकि ताइवान सरकार ने 2019 में ही ऐसी नीति को अपनाते हुए अपने देश की कंपनियों को वापस देश में बुलाना शुरू कर दिया था। अमेरिका ने भी अपने देश की कंपनियों को चीन से किस तरह वापस बुलाया जाए, इस नीति पर काम करना शुरू कर दिया है। आईफोन बनाने वाली एप्पल ने पहले ही अपनी कंपनी को भारत में शिफ्ट करने का फैसला कर लिया है। वहीं भारत ने कई चीनी कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करके चीन को बड़ा झटका दिया है।


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