
Punjab : राज्य के जल सप्लाई एवं स्वच्छता मंत्री ब्रम शंकर जिंपा ने कहा कि सरकार प्रदेश में बेहतर जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए इजराइल के साथ रणनीतिक सांझेदारी करेगी।
ब्रम शंकर जिंपा ने कहा कि टिकाऊ जल सप्लाई और सीवरेज के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए इजराइली तकनीक और स्वदेशी अविष्कार का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करेगी।
शुक्रवार को पंजाब भवन में इजराइल दूतावास के वॉटर अटैच डा. लियोर आसफ, इजराइल दूतावास के सीनियर जलस्रोत विशेषज्ञ नीरज गहिलवत, इंटरनेशनल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और थापर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. अमित धीर के साथ गोलमेज बैठक की।
जल सप्लाई एवं स्वच्छता मंत्री ब्रम शंकर जिंपा ने इस दौरान गंदे पानी कि परेशानी से निपटने और देश की मदद के लिए इजराइल द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। सरकार प्रदेश में गिरते भूजल स्तर को लेकर बहुत परेशान है। ग्रामीण इलाकों के तालाबों के पानी की गुणवत्ता को बेहतर करने का प्रयत्न किया जा रहा हैं।
जिंपा ने इस अवसर पर होशियारपुर में वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा करने का अपना अनुभव को भी साझा किया। जहां गंदे पानी को साफ किया जाता है और भंडारण के लिए उपयोग किया जा रहा है।
नई तकनीकों को अपनाने में पंजाब के पूरे सहयोग का आश्वासन देते हुए डा. लियोर आसफ की तरफ से कहा गया है कि इजराइल के जो जल संसाधन है। इसका करीब 50 फीसदी पानी समुद्र से साफ किए पानी, रिसाइकिल पानी और रिचार्ज किए गए पानी से आता है।
वर्ष 1980 तक जब देश प्राकृतिक जल के इस्तेमाल पर ही निर्भर था। इजराइल ने ऐसी तकनीक विकसित की हैं। जिस तकनीक का इस्तेमाल करके 90 प्रतिशत गंदे पानी को फिर से उपयोग में लिया जा सकता है।
हर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है। इसको कृषि भूमि के पास विकसित किया गया है ताकि जो यह पानी है इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सके।
जल सप्लाई और स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव डीके तिवारी ने इस अवसर पर बोलते हुए गंदे पानी को दोबारा इस्तेमाल के लिए कम लागत वाली जो तकनीक है। उस तकनीकी समाधान के लिए इजराइल से विचार मांगे।
उन्होंने कहा है कि मुख्य मंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार नहरी जल के उपयोग को बढ़ाकर जलवायु अनुकूल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं विकसित कर रही है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न तकनीकों के आधार पर बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके 24×7 पानी की सप्लाई और स्वच्छता सुविधाओं के साथ 500 स्मार्ट गांव विकसित करना है।
विभाग 1 हजार 300 करोड़ रु की अनुमानित लागत से ब्लॉक-स्तरीय प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन यूनिट और मटीरियल रिकवरी सुविधाओं, फेकल संसद ट्रीटमेंट प्लांट आदि की स्थापना करके गंदे पानी और ठोस वेस्ट का प्रबंधन भी कर रहा है।
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