नयी दिल्ली। आज जीएसटी परिषद की 4वीं बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने बैठक पर जानकारी दी। एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने साफ किया कि जीएसटी दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। पांडे ने कहा कि बैठक मुआवजे (केंद्र सरकार की तरफ से राज्यों को जीएसटी नुकसान की भरपाई के लिए किया जाने वाला भुगतान) के मुद्दे पर रही। चालू वर्ष में महामारी के कारण आर्थिक मंदी आई, जिससे जीएसटी कलेक्शन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। जीएसटी मुआवजे का भुगतान ट्रांसिशन अवधि के लिए किया जाना है, जो कि जुलाई 2017 से जून 2022 तक है। इसके लिए सेस (उपकर) से राजस्व की पूर्ति की जाएगी। पांडे ने कहा कि अटॉर्नी जनरल का स्पष्ट मत था कि मुआवजे के अंतर को भारत के कंसोलिडेटेड फंड से पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कमी को पूरा करने के लिए मुआवजा उपकर को 5 वर्ष से आगे बढ़ाया जा सकता है।

ये है दूसरा ऑप्शन
दूसरा विकल्प यह है कि आरबीआई राज्यों को कैसे लोन दे सकता है। इन विकल्पों को 7 दिनों के भीतर राज्यों को भेजा जाएगा। यह विकल्प इस वित्त वर्ष के लिए ही लागू होगा। राज्यों को 97000 करोड़ रु की स्पेशल लोन विंडो प्रदान करने के लिए आरबीआई के परामर्श से उचित ब्याज दर पर इस धनराशि को उपकर कलेक्शन से 5 साल बाद चुकाया जा सकता है। इस वर्ष की कुल जीएसटी क्षतिपूर्ति (2,35,000 करोड़ रुपये) का अंतर राज्यों को आरबीआई के परामर्श से दिया जा सकता है।
किया जाएगा 1.5 लाख करोड़ रु का भुगतान
अप्रैल-जुलाई 2020 के दौरान राज्यों को भुगतान किए जाने वाला कुल जीएसटी मुआवजा 1.5 लाख करोड़ रुपये है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अप्रैल और मई में जीएसटी कलेक्शन नाम मात्र रहा। वार्षिक जीएसटी मुआवजे की राशि करीब 3 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। उपकर कलेक्शन लगभग 65,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जिसमें 2.35 लाख करोड़ रुपये का अंतर रहेगा।
क्या कहा वित्त मंत्री ने
मीडिया ब्रीफिंग में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यों के सामने दो विकल्प रखे गए थे। राज्यों ने सरकार से दोनों विकल्पों को विस्तार से समझाने का अनुरोध किया। इस पर राज्यों को विचार करने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है। इसके बाद एक संक्षिप्त जीएसटी परिषद की बैठक फिर से हो सकती है। एक बार जीएसटी काउंसिल द्वारा व्यवस्था पर सहमति बने तो इस मामले पर तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है और राज्यों को बकाया का भुगतान किया जा सकता है।
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