नयी दिल्ली। सरकार करीब 23 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू या सरकारी कंपनियां) की हिस्सेदारी बेचने पर काम कर रही है। इन पीएसयू को बेचने के लिए कैबिनेट भी हरी झंडी दिखा चुका है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार पीएसयू में उस समय हिस्सेदारी बेचना चाहती है जब वह सही मूल्य प्राप्त करती है। यानी सरकार इन पीएसयू को सही समय और सही मूल्य पर बेचेगी। बता दें कि बजट 2020 में वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया था। इसमें से 1.20 लाख करोड़ रुपये पीएसयू में हिस्सा बेच कर और बाकी 90,000 करोड़ रुपये वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बेच कर हासिल किया जाएगा।
एलआईसी भी लगी है लाइन में
विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार एलआईसी का भी आईपीओ लाएगी। आईपीओ के जरिए सरकार एलआईसी में अपनी थोड़ी हिस्सेदारी बेचेगी। एलआईसी, जिसमें सरकार की 95 फीसदी हिस्सेदारी है, के पास 34 लाख करोड़ रु की संपत्ति है। मालूम हो कि सरकार का प्लान 2.10 लाख करोड़ रु के विनिवेश लक्ष्य में से 90,000 करोड़ रुपए एलआईसी के आईपीओ और आईडीबीआई बैंक के विनिवेश के जरिए जुटाने का है। एलआईसी के आईपीओ के लिए बतौर सलाहकार सिटीग्रुप, इडेलवाइज, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, क्रेडिट सुइस और डेलॉयट को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन पांचो में से किसी 2 को ये जिम्मेदारी दी जाएगी।
भारत पेट्रोलियम भी बिकने को तैयार
सरकार की बीपीसीएल में 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका प्लान पूरी की पूरी हिस्सेदारी बेचने का है। बीपीसीएल में लगभग 20,000 कर्मचारी हैं। बिकवाली से पहले कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) लेकर आई है। कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार 5 से 10 फीसदी कर्मचारियों के वीआरएस का विकल्प चुनने की उम्मीद है। सरकार ने बीपीएस को खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) या आवेदन 31 जुलाई तक मांगे हैं। बीपीसीएल खरीदारों को भारत की तेल रिफाइनरी क्षमता में 15.3 प्रतिशत और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजार में 22 प्रतिशत ईंधन बाजार हिस्सेदारी देगी।
क्यों बेचना चाहती है पीएसयू को सरकार
कुछ महीने पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि विनिवेश के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाएगा, जिसका अर्थव्यवस्था पर कई तरह से पॉजिटिव असर पड़ेगा होगा और राजस्व घाटे में कमी नहीं होगी। चालू वित्त वर्ष में रखे गए विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत पेट्रोलियम और एलआईसी की हिस्सेदारी बेचना शामिल है। वित्त मंत्री ने साफ किया था कि विनिवेश से जुटाया गया धन इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगाया जायेगा।
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