कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस साल मंदी दिखाई देगी। चीन की अर्थव्यवस्था कोरोनोवायरस महामारी से उबरने की कुछ अस्थायी संकेत दिखा रही है।
नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस साल मंदी दिखाई देगी। चीन की अर्थव्यवस्था कोरोनोवायरस महामारी से उबरने की कुछ अस्थायी संकेत दिखा रही है। इसके साथ ही अगर हम बात करें भविष्य की तो चीन के लिए आगे का रास्ता बेहद अनिश्चित बना हुआ है। जिससे 2020 में चीन की विकास पूरी तरह से खत्म हो सकती है और लाखों नौकरियों पर खतरा आ सकता है।

विश्लेषकों का हालिया अनुमान के तहत इस साल जीडीपी की वृद्धि दर महज 1% या 2% रह सकती है, जो कि पिछले साल के 6.1% से नीचे है। वहीं चीन सरकार के अर्थशास्त्री ने भी इस बात का अनुमान लगाया है। वहीं दूसरी ओर विश्व बैंक ने इस सप्ताह की शुरुआत में चेतावनी दी थी कि सबसे खराब स्थिति में, 14 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बिल्कुल भी नहीं बढ़ सकती है। यह 2008 के वैश्विक मंदी के दौरान और 1990 में, जब तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के बाद चीन पर प्रतिबंध लगाए गए थे, उस वक्त भी चीन की ऐसी बुरी हालत नहीं हुई थी, यह बीते 44 वर्षों में सबसे कमजोर प्रदर्शन है। यूबीएस और गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने हाल ही में इस साल चीन के विकास के लिए अपने अनुमानों को क्रमशः 1.5% और 3% तक घटा दिया।
यहां तक कि चीनी अधिकारी, जिन्होंने 1985 से हर साल वार्षिक जीडीपी लक्ष्य निर्धारित करते आए हैं, वह इस बार भविष्यवाणियां करने से कतरा रहे हैं। वहीं पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) के एक नीति निर्माता ने इस सप्ताह कहा कि सरकार को 2020 के लिए लक्ष्य निर्धारित नहीं करना चाहिए। मौद्रिक नीति समिति के सदस्य के मुताबिक "4% से 5% के बीच विकास को पाना मुश्किल है। इस साल कई लोगों ने विकास दर 1% या 2% तक गिरने की भविष्यवाणी की है।


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