2020 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का कायाकल्प बदलने वाला है। जी हां रिल ने अपने मौजूद और आगामी डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्मों के लिए एक अलग अनुषंगी कंपनी बनाने का फैसला किया है। कंपनी ने इस बारे में शुक्रवार को कहा कि उसके निदेशक मंडल ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी की स्टॉक के अनुसार, नई कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूरी अनुषंगी इकाई होगी और इसमें 1.08 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) में रिलांयस इंडस्ट्रीज की भागीदारी को 65,000 करोड़ रुपये में अधिग्रहीत करेगी।
इस पर रिलायंस ने कहा कि रिलायंस जियो इन्फोकॉम के निदेशक मंडल ने कंपनी और उसके कुछ प्रकार के निवेशकों के बीच एक नई व्यवस्था को मंजूरी दी है, जिसमें उसके ऋणदाता शेयरधारकों भी शामिल होंगे। नई व्यवस्था के तहत कंपनी की कुछ चिह्नित देनदारियां रिलायंस इंडस्ट्रीज को हस्तांतरित की जाएगी। ये देनदारियां 1.08 लाख करोड़ रुपये तक होंगी। इन देनदारियों के हस्तांतरण में भुगतान के लिए इतने ही मूल्य के तरजीही शेयर (ओसीपीएस) जारी किए जाएंगे, जिनको शेयर में बदलने का विकल्प होगा।

इससे, रिलायंस जियो इंफोफॉम 31 मार्च, 2020 तक कर्ज से पूरी तरह से मुक्त हो जाएगी और उस पर सिर्फ स्पेक्ट्रम संबंधी देनदारियां ही बचेंगी। आरआईएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि यह एक तरह से बाजार में आमूल-चूल परिवर्तन करने वाला डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म होगा। यह भारत की नंबर एक संपर्क सेवा, अग्रणी डिजिटल एप तंत्र और विश्व की सबसे अच्छी प्रौद्योगिकी क्षमताओं से जुड़ा होगा।
तो वहीं इस बारे में मुकेश अंबानी ने कहा कि बहुत से संभावित निवेशकों ने इसमें भागीदारी के लिए इच्छा जताई है। कंपनी अच्छे भागीदारों का चयन करेगी ताकि आरआईएल के निवेश को उनके निवेश का अच्छा मूल्य मिल सके।


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