इस दिवाली पर चीनी पटाखा खरदीना भारी पड़ सकता है। जी हां दिवाली नजदीक आते ही पटाखों को लेकर सख्त दिशा निर्देश आने लगे हैं।
नई दिल्ली: इस दिवाली पर चीनी पटाखा खरदीना भारी पड़ सकता है। जी हां दिवाली नजदीक आते ही पटाखों को लेकर सख्त दिशा निर्देश आने लगे हैं। खास तौर पर चीनी पटाखों पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की बात हो रही है। दिवाली से ठीक पहले सरकार ने चाइनीज पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। बता दें कि सोमवार को कस्टम विभाग के प्रिंसिपल कमिश्नर ने इस संबंध में एक नोटिस जारी किया है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि पटाखों के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। अगर कोई व्यक्ति चाइनीज पटाखों को रखता है, बेचता है या फिर किसी तरह से इसकी डीलिंग करता है तो उन्हें कस्टम एक्ट 1962 के तहत दंडित किया जाएगा।

पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक चीनी पटाखे
जानकारी दें कि चीनी पटाखे पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसके साथ ही ये विस्फोटक नियम, 2008 के भी खिलाफ हैं। चीनी पटाखों में रेड लेड, कॉपर ऑक्साइड और लिथियम जैसे बेहद खतरनाक रसायन होते हैं, जो पर्यावरण के साथ साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी घातक हैं। चीनी पटाखें देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ घरेलू उद्योग पर भी बुरा असर डालते हैं।
पटाखों पर लगे लेबल से पता करें चीन में बने पटाखे
वहीं कस्टम विभाग ने लोगों से खतरनाक चीना पटाखों को न खरीदने की अपील कि है। पटाखों पर लगे लेबल से अपको पता चल जाएगा की ये चीन में बने पटाखे हैं या नहीं। विभाग ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपने घर पर चीनी पटाखों को जमा कर के रखा है तो वह विभाग की चेन्नई ब्रांच में फोन कर जानकारी दे सकता है। इसके लिए विभाग ने नंबर 044-25246800 जारी किया है।
विकल्प के तौर पर करें इन पटाखों का इस्तेमाल
दूसरी ओर आपको बता दें कि सरकार ने विकल्प के तौर पर ग्रीन पटाखों को नागरिकों के लिए उपलब्ध करवाया है। दावा किया जाता है कि यह चीनी पटाखों की तुलना में 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। गौरतलब है कि जिन पटाखों में हानिकारक केमिकल नहीं होते और जिन्हें फोड़ने से वायु प्रदूषण भी नहीं होता, ऐसे पटाखों को ग्रीन पटाखे कहा जाता है। इन पटाखों में हानिकारक चीजों को अन्य कम हानिकारक तत्वों से बदल दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है।


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