किसानों के लिए मोदी सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। दरअसल, बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रबी फसलों के नए समर्थन मूल्यों (रबी फसल एमएसपी) को बढ़ाया गया। जानकारी के मुताबिक, सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 85 रुपये/ क्विंटल का इजाफा किया है। सरकार के इस फैसले के बाद गेहूंकी न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये से बढ़कर 1925 रुपये/क्विंटल हो गया है।

रिर्पोट के अनुसार बाजरे का समर्थन मूल्य 1440 रुपये से बढ़ाकर 1525 रुपये/ क्विंटल, मसूर का मूल्य 4400 रुपये से बढ़ाकर 4800 रुपये और सरसों की सरकारी खरीद मूल्य 4200 रुपये क्विंटल से बढ़ाकर 4425 रुपये/ क्विंटल कर दिया गया है।
रबी फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने के फैसले से सरकार पर 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। बता दें कि वर्ष 2018-19 के लिए खादी बिल 1.74 लाख करोड़ रुपये का था।
आपको बता दें कि रबी फसलों की बुआई अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीने में की जाती है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और मटर रबी सीजन की मुख्य फसलें हैं।
जानकारी हो कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर गेहूं और सरसों की खेती होती है। इन राज्यों से सरकार बड़ी मात्रा में गेहूं और सरसों की खरीद करती है।
दाल की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मसूर का एमएसपी 325 रुपये बढ़ाकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है जो पिछले साल 4,475 रुपये प्रति क्विंटल पर था। इसी प्रकार चना का एसएमपी 255 रुपये बढ़ाकर 4,875 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। इससे पिछले वर्ष यह 4,620 रुपये प्रति क्विंटल था।
इस बार का मॉनसून रबी की फसल के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होने वाला है। मौसम की मेहरबानी को देखते हुए सरकार ने भी फसली वर्ष 2019-20 के रबी सीजन (रबी सीजन) में 10.05 करोड़ टन (गेहूं) उत्पादन का टारगेट तय किया है। इस बार रबी सीजन की फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। पिछले रबी सीजन में देश में रिकॉर्ड 10.21 करोड़ टन गेहूं उत्पादन (गेहूं उत्पादन) का अनुमान था।


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