देश की आर्थिक हालात में अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मोदी सरकार को झटका दिया है।
नई दिल्ली: देश की आर्थिक हालात में अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मोदी सरकार को झटका दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के विकास अनुमान में 0.9 फीसदी की बड़ी कटौती करते हुए इसे 6.1 फीसदी कर दिया है। आईएमएफ की मंगलवार को जारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, अक्टूबर 2019 रिपोर्ट में मौजूदा वर्ष के लिए वैश्विक विकास अनुमान 3.3 फीसदी से घटाकर तीन फीसदी कर दिया गया है, जो 2008-09 के बाद सबसे कम है।

मंदी के बाद सबसे निचले स्तर पर रहने की आशंका
बता दें कि आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि इस समय दुनिया मंदी के दौर से गुजर रही है तथा आर्थिक विकास की गति एक दशक पहले की आर्थिक मंदी के बाद सबसे निचले स्तर पर रहने की आशंका है। व्यापारिक गतिरोध, व्यापार को लेकर अनिश्चितता तथा अंतरराष्ट्रीय तनाव मंदी के प्रमुख कारक है। वहीं वर्ष 2020 के लिए वैश्विक विकास अनुमान 3.6 फीसदी से घटाकर 3.4 फीसदी कर दिया गया है। आईएमएफ ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत का विकास अनुमान 6.1 फीसदी रखा है। जुलाई में जारी अनुमान में इसके सात फीसदी पर रहने की बात कही गई थी। अगले वित्त वर्ष के लिए भारत का विकास अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर सात फीसदी कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चार अगस्त को जारी मौद्रिक नीति बयान में देश का विकास अनुमान पहले के 6.9 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया था।
विश्व बैंक ने भी घटाया अनुमान
दूसरी ओर बता दें कि रविवार को आईएमएफ से पहले विश्व बैंक ने भी जीडीपी का अनुमान घटाकर के छह फीसदी कर दिया था। इससे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को झटका लग सकता है। विश्व बैंक के अनुसार, भारत की विकास दर छह फीसदी रह सकती है। जबकि साल 2018-19 में वृद्धि दर 6.9 फीसदी थी। विश्व बैंक का कहना है कि साल 2021 में वृद्धि दर दोबारा 6.9 फीसदी पर आ सकती है। वहीं 2022 में इसमें और भी सुधार हो सकता है। साल 2022 में भारत की विकास दर 7.2 फीसदी पर रहने का अनुमान है।


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