फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार

फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को पुलिस ने धोखाधड़ी और ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। मलविंदर और शिविंदर की गिरफ्तारी आर्थिक अपराध शाखा द्वारा हुई है।

नई द‍िल्‍ली: फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को पुलिस ने धोखाधड़ी और ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। मलविंदर और शिविंदर की गिरफ्तारी आर्थिक अपराध शाखा द्वारा हुई है। जानकारी दें कि शिविंदर को गुरुवार शाम को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया, वहीं, मलविंदर सिंह को आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने गुरुवार देर रात पंजाब से पकड़ा। वहीं दोनों भाइयों पर धोखाधड़ी और ठगी का आरोप है। शिविंदर के साथ तीन और लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

Former Ranbaxy Promoter Arrested For Fraud And Cheating

शिविंदर सिंह पर 740 करोड़ रु के धोखाधड़ी का आरोप

इन चारों की गिरफ्तारी तब हुई थी जब इन सभी को मंदिर मार्ग में ईओडब्ल्यू कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्‍लू) की डीसीपी वर्षा शर्मा ने बताया कि पुलिस ने शिविंदर सिंह, सुनील गोडवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना को गिरफ्तार किया है। जबकि आरोपियों को आईपीसी की धारा 409 और 420 के तहत गिरफ्तार किया गया है। रेलीगेयर फिनवेस्ट की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। बता दें कि शिविंदर सिंह पर 740 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का आरोप है। बता दें कि पुलिस कथित तौर पर शिविंदर सिंह के बड़े भाई मालविंदर सिंह की भी तलाश कर रही है, जिनका नाम भी इस मामले में है।

दोनों भाइयों ने 2016 में किया था घोटाला

रेलिगेयर के एक सीनियर मैनेजर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज की थी। शिकायत के मुताबिक कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी Religare Finvest Limited (RFL) से साथ धोखाधड़ी की गई थी और उसकी हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति की गलत फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के जरिए हेराफेरी की गई। इस एफआईआर में कहा गया था कि सिंह ब्रदर्स ने दूसरे आरोपी के साथ मिलकर 2016 में इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। बता दें कि इसमें आरोप लगाया गया है कि दोनों भाइयों ने 'सोच-विचार कर आपराधिक साजिश रची, जिसके जरिए बड़ा वित्तीय घपला किया गया। वहीं शिकायत में कहा गया था कि सिंह ब्रदर्स फरवरी 2018 तक आरईएल के प्रमोटर थे और बतौर प्रमोटर 'आरएफएल के मैनेजमेंट पर उनका बहुत ज्यादा कंट्रोल था, क्योंकि यह सब्सिडियरी कंपनी थी।

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