अगस्त महीने में आठ कोर सेक्टर्स की विकास दर रिपोर्ट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
पहले जीडीपी में गिरावट और अब कोर सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है। जी हां अगस्त महीने में आठ कोर सेक्टर्स की विकास दर रिपोर्ट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त महीने में 8 कोर सेक्टर्स की ग्रोथ घटकर 0.5 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि जुलाई महीने में यह ग्रोथ 2.1 फीसदी थी। तो वहीं अगस्त 2018 में आठ कोर सेक्टर्स की विकास दर 4.7 प्रतिशत थी।

इस महीने के दौरान, रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन के दौरान कोयला (-8.6%), कच्चा तेल (-5.4%), प्राकृतिक गैस (-3.9%), सीमेंट (-4.9%) और बिजली (-2.9%) का उत्पादन हुआ। तो वहीं रिफायनरी प्रोडक्ट में (2.6%), उर्वरक (2.9%) और स्टील में (5%) की वृद्धि हुई।
आपको बता दें कि पिछले अगस्त की तुलना में इस साल आठ कोर सेक्टर्स की विकास दर में लगभग 90 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। मोदी सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है।
दरअसल, तमाम कोशिशों के बावजूद उद्योगों की वृद्धि दर में वृद्धि नहीं पकड़ पा रही है। जुलाई में आठ कोर सेक्टर की विकास 2.1 प्रतिशत थी, जिससे एक उम्मीद जगी थी कि आगे सुधार देखने को मिलेगा। लेकिन अब अगस्त के आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है।
तो वहीं इससे पहले जून महीने में 8 प्रमुख उद्योगों की ग्रोथ घटकर 0.2 प्रतिशत रही थी। कोर सेक्टर में गिरावट की अहम वजह ऑयल के दाम में उछाल और सीमेंट उत्पादन में भारी सुस्ती बताई गई थी।
आठ प्रमुख उद्योग में कोयला, क्रूड, ऑयल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी आते हैं। इनकी भारत के कुल इंडस्ट्रियल आउटपुट (औद्योगिक उत्पादन) में लगभग 40 फीसदी हिस्सा होता है।
इस हफ्ते के अंत में अपनी नीति समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती के लिए यह कोर सेक्टर डेटा भारतीय रिजर्व बैंक को प्रेरित कर सकता है। जून तिमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय वृद्धि घटकर 3.1% हो गई - 18 तिमाहियों में सबसे धीमी- विकास दर का समर्थन करने के लिए RBI पर नीतिगत दरों में कटौती का दबाव होगा।


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