फोन निर्माता कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की वजह से पिछले एक साल में 30 हजार से ज्यादा स्टोर बंद हो गए हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।
ई-कॉमर्स कंपनियों छोटे दुकानदारों और रिटेलर्स के लिए काफी मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। जिस कारण से ऑफलाइन मोबाइल स्टोर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर उनके धंधे को चौपट करने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्रालय, भारत के कंपिटिशन कमीशन और डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) को एक पत्र लिखकर कहा है कि मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की वजह से पिछले एक साल में 30 हजार से ज्यादा स्टोर बंद हो गए हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। असोसिएशन ने पत्र में अपना धंधा बचाने की गुहार लगाई है।

बता दें कि एआईएमआरए ने पत्र में लिखा है कि ई-कॉमर्स कंपनियां सीधे मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों से समझौता करके स्मार्टफोन को कम कीमत पर बेचती हैं। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर कीमत में भारी अंतर होता है, जिससे ऑफलाइन रिटेल स्टोर पर बिक्री नहीं होती है। इसके अलावा कंपनियों ने भी नए लॉन्च किए स्मार्टफोन सीधे ई-कॉमर्स कंपनियों को उपलब्ध कराती हैं।
जब अनलिमिटेड प्लेटफॉर्म पर बिक्री कम हो जाती है, तब उन्हें ऑफलाइन स्टोर पर उपलब्ध कराया जाता है। इससे इनकी बिक्री नहीं होती है। केवल वही लोग ऐसे स्मार्टफोन की खरीदारी करते हैं जो ऑनलाइन खरीदारी से चूक जाते हैं।
तो वहीं एसोसिएशन ने पत्र में कहा है कि मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के इस गठजोड़ की वजह से ऑफलाइन स्टोर लगातार बंद होते रहे हैं। एसोसिएशन ने पत्र में सभी जगह पर एक प्रोडक्ट और एक समय में सभी जगहों पर एक ही कीमत तय करने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन ने कहा है कि ऑनलाइन रिटेलर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान नहीं करते हैं जिससे सरकार को राजस्व का का भी नुकसान होता है।


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