सीतारमण ने केंद्र सरकार की सभी कंपनियों (सीपीएसई) को 15 अक्टूबर तक वेंडर्स और कंट्रैर्क्स के सभी बकाए का भुगतान कर देने का निर्देश दिया।
शनिवार यानी आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र सरकार की सभी कंपनियों (सीपीएसई) को 15 अक्टूबर तक वेंडर्स और कंट्रैर्क्स के सभी बकाए का भुगतान कर देने का निर्देश दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के प्रमुखों के साथ बैठक कर पूंजीगत खर्च के कार्यक्रमों की समीक्षा की। सरकार खर्च में वृद्धि कर आर्थिक विकास दर को छह साल के निचले स्तर से ऊपर उठाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर पांच प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो गत छह साल का निम्नतम स्तर है।

वित्तमंत्री ने शनिवार को केंद्र सरकार की कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक बैठक की और पूंजी खर्च को लेकर उनकी योजना का जायजा लिया। मंत्री ने कहा कि सरकारी कंपनियों को 15 अक्टूबर तक एक पोर्टल बनाने का भी निर्देश दिया गया है, जिस पर सेवा प्रदाता, वेंडर्स और कांट्रैक्टर्स अपने बिल और भुगतान की स्थिति को ट्रैक कर सकेंगे।
इस मौके पर सीतारमण ने कहा कि सरकारी कंपनियों को यह बताने के लिए भी कहा गया है कि भुगतान संबंधी विभिन्न विवादों के सुलझने में कोई वक्त नहीं लगेगा। इसके साथ ही सरकारी कंपनियों को अगले चार तिमाहियों के लिए खर्च की योजना जमा करने का भी निर्देश दिया गया है।
तो वहीं व्यय सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू ने कहा कि सभी 242 सरकारी कंपनियां चार लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने वाली हैं। वित्त सचिव राजीव कुमार ने कहा कि 34 सरकारी कंपनियों ने 48,077 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ये 34 कंपनियां दिसंबर 2019 तक 50,159 करोड़ रुपये खर्च करती हैं और इसके अलावा 54,700 करोड़ रुपये जनवरी-मार्च में खर्च करती हैं।
आपको बता दें कि इस बैठक में इस बैठक में एनएचएआई, एलएल, इंडियन ऑयल, ओवैसी, एचएएल, एनएचपीसी, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, गेल, हिंदुस्तान पेट्रोलिंग और एमएसएमई के सचिव शामिल रहे।


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