नई दिल्ली। शेयर बाजार की नियामक संस्था सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने म्युचुअल फंड में निवेश को लेकर कई अहम बदलाव किया है। इन फैसलों से निवेशकों को काफी फायदा होगा। इन फैसलों के तहत अब निवेशकों से अपफ्रंट कमीशन नहीं लिया जा सकता है। इसका मतलब है निवेशक जितने पैसे का निवेश करेंगे उनको अब उतने पैसों की यूनिट एलाट की जाएगी। इसके अलावा अधिकतर खर्चों को शुरू में काटने व ऐसे खर्चों की लिमिट तय करने जैसे उपाय भी शामिल हैं।

एक्सपेंस रेश्यो के मामले में भारत का स्तर अच्छा
जानकारों के अनुसार भारत में शुल्क और खर्च का स्तर सुधरकर अब एवेरज पर आ गया है। हालांकि 2017 में यह एवरेज से नीचे ही था। एक जानकारी के अनुसार पहले एक्सपेंस रेश्यो के मामले में भारत सर्वाधिक महंगे देशों में एक था। हालांकि अब अपफ्रंट लोड पर रोक और कुल व्यय अनुपात (टीईआर) में कमी के सेबी के फैसलों से भारत की स्थिति में सुधार आया है।
म्यूचुअल फंड की एएमयू में बढ़त दर्ज
देश में इस वक्त 42 म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं। इन सबकी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एएमयू) अगस्त 2019 में करीब 4 फीसदी बढ़कर 25.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इससे पहले महीने यानी जुलाई 2019 में यह 24.53 लाख करोड़ रुपये थी। चालू वित्तीय वर्ष के पहले 5 महीनों में म्यूचुअल फंड की एएमयू करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये बढ़ी है। जानकारों के अनुसार देश में शेयर बाजार में गिरावट का दौर है। लेकिन ऐसे में भी निवेशक अपनी एसआईपी चला रहे हैं। इससे पता चलता है कि देश में निवेशकों में जागरूगता आई है। यह अच्छी बात है।
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