सरकार ने खरीफ फसल कटाई के मौसम से पहले कृषि क्षेत्र में तरलता को बढ़ावा दिया।
सरकार ने सोमवार को खरीफ फसल कटाई के मौसम से पहले कृषि क्षेत्र में तरलता को बढ़ावा दिया। इसने कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के माध्यम से किए गए एक करोड़ रुपये से अधिक के नकद भुगतान पर स्रोत (टीडीएस) पर काटे गए 2 प्रतिशत कर का भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया है।

दरअसल सरकार ने बजट में नकद लेनदेन को हतोत्साहित करने और नकदीरहित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी पर दो प्रतिशत टीडीएस काटने का प्रावधान किया था। यह प्रावधान 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा।
यह जानकारी वित्तमंत्री के ट्वीट से मिली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, 'APMCs की चिंता को दूर करते हुए उसके जरिये किए गए 1 करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान पर 2 प्रतिशत का टीडीएस नहीं लगेगा। इससे किसानों को उनकी उपज का भुगतान तत्काल करने में मदद मिलेगी।'
साथ ही इस बीच, मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि 23 अगस्त, 2019 से 31 मार्च, 2020 के दौरान खरीदे गए वाहनों पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्यह्रास की अनुमति होगी। सीतारमण ने कहा कि इस कदम से वाहन क्षेत्र की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तो वहीं बसों, लॉरियों और टैक्सियों के मामले में मूल्यह्रास की दर को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत किया गया है। मूल्यह्रास से कंपनियों को अपनी कर देनदारी कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ विजय सरदाना का मानना है कि एपीएमसी को दी गई छूट से किसानों को नहीं, व्यापारियों को फायदा होगा।
इस बारे में अधिकारियों ने कहा है कि महाराष्ट्र की कई मंडियों में, 1 सितंबर, 2019 से लागू होने वाली अधिसूचना के कारण नकदी में कमी आयी है। व्यापारी 1 करोड़ रुपये से अधिक के नकद भुगतान करने से सावधान थे। तो वहीं सौराष्ट्र में व्यापारियों ने हाल ही में टीडीएस कदम का विरोध किया और एपीएमसी लेनदेन को निलंबित कर दिया। बता दें कि खरीफ की कटाई का मौसम अक्टूबर के आसपास शुरू होता है।


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