सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य-आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 1.08 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही, यहां तक कि खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ीं फिर भी महंगाई दर स्थिर रही।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य-आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 1.08 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही, यहां तक कि खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ीं फिर भी महंगाई दर स्थिर रही। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति इस साल जुलाई में 1.08 प्रतिशत और अगस्त 2018 में 4.62 प्रतिशत थी।

तो वहीं खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई अगस्त में 7.67 फीसदी हो गई, जो इस साल जुलाई में 6.15 फीसदी थी। खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह सब्जी और प्रोटीन की अधिकता वाली चीजों की कीमतें बढ़ना रहा।
तो वहीं सब्जियों की थोक महंगाई अगस्त में 13.07 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 10.67 प्रतिशत के स्तर पर थी। प्रोटीन की अधिकता वाले आइटम समूह जैसे अंडा, मांस और मछली के मामले में थोक महंगाई 6.60 प्रतिशत रही। जुलाई 2019 में यह महंगाई 3.16 प्रतिशत के स्तर पर थी।
इसके अलावा इंधन व बिजली की थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई। अगस्त में यह -4 प्रतिशत रही। जबकि जुलाई में यह -3.64 प्रतिशत के स्तर पर रही थी।
तो वहीं मांस और मछली, सब्जियां और दालों के मूल्य बढ़ने से अगस्त महीने में खुदरा महंगाई मामूली बढ़कर 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गया। यह 10 महीने का उच्चतम स्तर है। हालांकि, महंगाई अभी भी रिजर्व बैंक के लक्ष्य के दायरे में है, इससे नीतिगत दरों में कटौती की संभावना बरकरार है। इससे पिछले महीने जुलाई में खुदरा महंगाई 3.15 फीसदी थी, जबकि पिछले साल अगस्त में फ्लिप महंगाई 3.69 फीसदी थी।
इससे पहले खुदरा महंगाई अक्टूबर 2018 में 3.38 प्रतिशत रही थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में खाद्य सामग्री वर्ग में 2.99 प्रतिशत मूल्य वृद्धि हो रही है, जो जुलाई में 2.36 प्रतिशत थी।


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