देश में लगातार डिजिटल पेमेंट सिस्टम बढ़ रहा है। इस सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने नए प्लान तैयार किए हैं।
नई दिल्ली: देश में लगातार डिजिटल पेमेंट सिस्टम बढ़ रहा है। इस सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने नए प्लान तैयार किए हैं। फोनपे और गूगलपे जैसी कंपनियों को जल्द झटका लग सकता है, क्योंकि नैशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने डिजिटल पेमेंट कंपनियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। कई तरह की शिकायतें मिलने के बाद ये निर्देश जारी किए गए हैं ताकि यूपीआई में जोखिमों को कम किया जा सके। एनपीसीआई द्वारा लागू महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक में डिजिटल पेमेंट कंपनियों की यूपीआई बाजार हिस्सेदारी की सीमा निर्धारित की गई है।

जल्द लॉन्च होनेवाली वॉट्सएप पे भी शामिल
बता दें कि इस कदम से सीधे तौर से यूपीआई-ओनली कंपनियों को नुकसान होगा, जिसमें वॉलमार्ट का फोनपे और गूगल पे के साथ ही जल्द लॉन्च होनेवाली वॉट्सएप पे भी शामिल है। अच्छी बात यह है कि पेटीएम इकलौती बड़ी कंपनी है, जो यूपीआई के अलावा अपने वॉलेट और कार्ड्स का समर्थन कर रही है। अप्रैल 2020 से फोनपे और गूगलपे को अपनी बाजार हिस्सेदारी 33 फीसदी तक की सीमा में ही रखनी होगी, जिससे अंतत: उनकी विकास योजनाओं में रुकावट आएगी।
वहीं सबसे अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इन कंपनियों ने अब तक काफी ज्यादा निवेश किया है, और यह कदम उनके लिए एक बड़ा झटका है। मॉर्गन स्टेलने ने हाल ही में वॉलमार्ट के शेयर कीमतों में वृद्धि के लिए फोनपे की सफलता को बड़ा श्रेय दिया था। लेकिन सीमा तय करने की नई नीति से कंपनी के मूल्यांकन और वित्त जुटाने की योजनाओं को भी झटका लगेगा, क्योंकि वह टाइगर ग्लोबल, टेंसेंट, डीएसटी ग्लोबल, सॉफ्टबैंक और अन्य से 1 अरब डॉलर जुटाने की प्रक्रिया में है।
डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को किया जायेगा सुरक्षित
जानकारी के मुताबिक यह गैर-बैंकिंग भुगतान कंपनियों द्वारा बढ़ते सुरक्षा खतरों पर एनसीपीआई की चिन्ताओं को दिखाता है। अब फोनपे को वित्त जुटाने की व्यवसायिक रणनीति पर पुर्नविचार करना होगा। वहीं, उद्योग के अन्य दिग्गजों और विशेषज्ञों ने एनपीसीआई के इस कदम की सराहना की है और उनकी राय है कि इससे भारत में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित किया जा सकेगा।


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