आर्थिक मंदी को लेकर देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक और बयान दिया है।
आर्थिक मंदी को लेकर देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक और बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी क्षेत्र की चुनौतियों पर गौर कर रही है और इनको लेकर आगे कदम उठातेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों को हर संभव मदद दी जाएगी। अर्थव्यवस्था में सुस्ती के सवाल पर सीतारमण ने कहा, हम उन चुनौतियों पर विचार कर रहे हैं, जिनके विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों को सामना करना पड़ा है। हम इन चुनौतियों को देखते हैं और उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाएंगे और प्रभावित क्षेत्रों को हर संभव मदद करेंगे।

साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, 'चुनौतियों का सामना कर रहे क्षेत्रों के साथ लगातार काम कर रही है और उनसे बातचीत कर रही है।' चालू वित्त वर्ष के दौरान राजस्व संग्रह को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा मुक्त बोर्ड (सीबीआईसी) को कर राजस्व के लक्ष्य दिए गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा, 'ये लक्ष्य उचित विचार - विमर्श और परामर्श के बाद दिए गए हैं। यदि राजस्व संग्रह कम रहता है, तो केंद्र सरकार इस पर ध्यान देगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र पर होने वाले खर्च को प्रभावित नहीं होने देंगे।' सरकार को आरबीआई से अधिशेष हस्तांतरण पर सीतारमण ने कहा कि इसका उपयोग कैसे किया जाए, इस बारे में केंद्र ने अभी तक कोई निर्णय नहीं किया है।
आरबीआई ने हाल ही में सरकार को लाभांश और अधिशेष आरक्षित निधि से 1.76 लाख करोड़ रुपये का अंतरित करने का फैसला किया गया है। वित्त मंत्री की यहां कर प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग करदाताओं के साथ आमना-सामना किए बिना कर आकलन की प्रणाली को आगे बढ़ाएगी और इस तरह की जांच प्रक्रिया को विजयदशमी के दिन से शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम करदाताओं को प्रताड़ित करने की संभावनाओं को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।


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