भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने खजाने से मोदी सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया है।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने खजाने से मोदी सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। इस पर मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक से मिले 1.76 लाख करोड़ रुपये के इस्तेमाल को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि इस बात से भी अवगत कराना चाहेंगे कि सरकार इस पैसे का इस्तेमाल बहुत सोच समझ कर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए करेगी। जानकारी दें कि जालान समिति ने सरकार को फंड देने की सिफारिश की थी। इस दौरान उन्होंने कारोबारियों को लेकर कहा कि इस देश में लघु, मध्यम, सूक्ष्म, नैनो या बड़े उद्यमी जो भी हों, हम चाहते हैं कि वे बिना किसी चिंता के अपने कारोबार को आगे बढ़ाएं।

चोर-चोर कहने पर जनता ने कांग्रेस को सबक सिखाया
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड ने केंद्र सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को मंजूरी दी थी। आरबीआई द्वारा इस फंड ट्रांसफर पर कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी द्वारा सवाल उठाए जाने पर वित्त मंत्रीनिर्मला सीतारमण ने कहा कि मुझे लगता है कि कम से कम कांग्रेस पार्टी को तो इस बारे में नहीं बोलना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी जब भी चोरी या चोर का विषय उठाते हैं तो मुझे बस एक ही चीज याद आती है कि उनके इतना चोर-चोर चिल्लाने के बाद जनता उनको सबक सीखा चुकी है।
कारोबार करने वाले आंत्रप्रेन्योर का सम्मान करता देश
इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कर अधिकारियों को लक्ष्य पाने के लिए आपाधापी नहीं करनी चाहिए। लक्ष्य असंभव नहीं है, इसे प्राप्त किया जा सकता है। देश सभी आकार का कारोबार करने वाले आंत्रप्रेन्योर का सम्मान करता है और यह महत्वपूर्ण है कि कर प्रशासन उन्हें उनके कारोबार में मदद करें न कि उन्हें संदेह की नजरों से देखें। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने विशेषज्ञों और आम आदमी से मुलाकात की है। इस सलाह-मशविरे का मुख्य मकसद घर खरीदारों, उद्योग और रिटर्न दाखिल करने को सरल बनाना था। जीएसटी कटौती के मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस पर जीएसटी काउंसिल फैसला लेगा।


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