यहां पर आपको हाइजीन प्रोडक्ट जैसे कि सैनिटरी नैपकिन और एडल्ट डायपर की कीमत से संबंधित खबर के बारे में बताएंगे।
जैसा कि आप सब जानते हैं कि मार्केट में सभी हाइजीन प्रोडक्ट की कीमत बहुत ज्यादा है, ऐसे में सरकार इन वस्तुओं की कीमत को नियंत्रित करने का एक बड़ा कदम उठा रही है। सरकार सैनिटरी नैपकिन्स, हैंड वॉश, कीटाणुनाशक और वयस्क डायपर्स जैसे जरूरी प्रोडक्ट की लिस्ट को अंतिम रूप दे रही है जिनके दाम को कम करने की जरूरत है। हालांकि, केवल जरुरी दवाओं की लिस्ट है जिनके दामों को नियंत्रित करना है।

इस लिस्ट में कुछ मेडिकल उपकरण भी शामिल हैं। हालांकि अब सरकार इस लिस्ट में कुछ उत्पादों को शामिल करने और कुछ को हटाने जा रही है। इसके अलावा सरकार मेडिकल उपकरण, डिस्पोजेबल और हाइजीन प्रोडक्ट्स की अलग-अलग लिस्ट भी तैयार कर रही है।
बता दें कि हाइजीन प्रॉडक्ट्स के दामों पर नियंत्रण का काम चल रहा है, लेकिन सरकार ने हाल में जरूरी दवाओं के दाम को कम किया था। लगभग 384 आवश्यक दवाओं की कीमत को लेकर मैक्सिमम रीटेल क्वालिटी पर कैप लगाकर कंट्रोल किया गया था, इसमें मेडिकल उपकरण जैसे स्टेंट्स को भी शामिल किया गया था। इस लिस्ट के अलावा दूसरी सभी दवाओं के लिए कंपनी को 10 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की अनुमति है। इतना ही नहीं, सरकार ने 42 कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन पर 30 प्रतिशत का कैप लगाया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिर्पोट के अनुसार आवश्यक हाइजीन प्रोडक्ट्स की लिस्ट बनाने का काम आखिरी चरण में है और अगले 2 महीनों के अंदर यह लिस्ट जारी हो सकती है। लिस्ट को 2 भागों में बांटा गया है- प्राइमरी और सेकंडरी। प्राइमरी कैटिगरी में रखे गए प्रोडक्ट्स की कीमत को नियंत्रित रखा गया है जबकि सेकंडरी प्रोडक्ट्स के लिए सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि यह लोगों को उचित मूल्य पर मिल सके।
अब एक बार सूची जारी हो गई तो नीति आयोग की कमिटी इस पर फैसला लेगी कि ट्रेड मार्जिन पर कैप लगाया जाए या सीलिंग प्राइज पर सीमा रेखा खींची जाए। एक अधिकारी ने बताया कि यह भी हो सकता है कि प्राइमरी कैटिगरी के लिस्ट के प्रोडक्ट्स पर क्वालिटी कैप लगाया जाए और सेकंडरी लिस्ट के प्रोडक्ट्स पर मार्जिन सीमा निर्धारित की जाए।


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