यहां पर आपको फसलों की कीमत से संबंधित योजना के बारे में पढ़ने को मिलेगा।
देश के किसानों के लिए सरकार एक खास योजना को लाने का प्लान बना रही है। बता दें कि कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ने केंद्र सरकार को फसलों के लिए भावांतर योजना की तर्ज पर एक योजना शुरू करने की सलाह दी है। आयोग ने कहा है कि यदि किसानों की फसल का मूल्य बाजार भाव से नीचे चला जाता है तो किसानों के खाते में एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच अंतर की राशि को किसानों के सीधे खाते में डाली जानी चाहिए।

सीएसीपी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की सिफारिश करता है। इसी तरह की योजना दो साल पहले मध्य प्रदेश में शुरू हुई थी। इस योजना का नाम भावांतर था।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिर्पोट के अनुसार CACP के अध्यक्ष विजय पॉल शर्मा ने बताया है कि यह योजना तब तक अच्छी तरह से काम कर सकता है जब सभी प्रमुख उत्पादक राज्य एक साथ वोट दिखाएँ और किसानों की फसल सरकारी भाव यानी एमएसपी पर खरीदने की सुविधा 6 महीने चले।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को इस योजना को एक साथ लागू करना चाहिए ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके और व्यापारी या बिचौलिये इसका फायदा उठा सकें। ऐसा इसलिए है कि सस्ते भाव पर एक राज्य से फसल खरीद कर बिचौलिये दूसरे राज्य में ज्यादा भाव पर बेचेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को अपनी उपज व्यापारियों को बेचने देना चाहिए और उन्हें इसकी भरपाई केवल तब करनी चाहिए जब बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो।
उन्होंने कहा, इससे सरकार को पैसे बचाने में भी मदद मिलेगी, खासकर जब फसल का आकार छोटा होता है और बाजार मूल्य एमएसपी से ऊपर होता है। उस स्थिति में, सरकार को कोई पैसा नहीं देना है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा खरीफ 2017 में पायलट योजना के आधार पर भावांतर योजना का उद्घाटन किया गया था, लेकिन कई कमियों के कारण सफल नहीं हो पाई। भावांतर योजना की आलोचनाओं में से एक यह था कि किसानों और व्यापारियों के बीच कार्टेलिजेशन के कारण बाजार में असमानता पैदा हुईं और कीमतें जानबूझकर घटाई गईं।


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