आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि प्लास्टिक एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसी समस्या से निपटने के लिए अब देशभर में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की दिशा में कई प्रयास किया जा रहा हैं।
नई दिल्ली: आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि प्लास्टिक एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसी समस्या से निपटने के लिए अब देशभर में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की दिशा में कई प्रयास किया जा रहा हैं। देशभर में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और सिंगल यूज़ प्लास्टिक को बैन करने के लिए भारत सरकार गंभीरता से कदम उठा रही है। 'से नो टू प्लास्टिक' अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पशुपालन और मत्स्य मंत्रालय बड़ी योजना बना रहा है।

प्लास्टिक को रिसाइकिल करने के लिए योजना
जानकारी दें कि योजना के मुताबिक, दूध और दूध से बने उत्पादों को पैक करने में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को रिसाइकिल करने के लिए योजना बनाई जा रही है। इसमें पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को ग्राहकों से वापस लेकर उसकी रिसाइक्लिंग की जाएगी और प्लास्टिक लौटाने पर ग्राहकों को दूध, दही, पनीर, छाछ, लस्सी या आइसक्रीम जैसी चीजों पर थोड़ी छूट भी दी जाएगी। यानी एक तरफ ये जनता को दूध और दूध के सामनों की बढ़ती कीमतों से थोड़ी राहत देने वाली है वहीं इससे प्लास्टिक से पैदा होने वाले प्रदूषण को भी कम किया जा सकेगा।
सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम करने के लिए पहल
दूसरी तरफ ये भी बता दें कि केंद्र सरकार ने दूध का विपणन करने वाली सभी डेयरी कंपनियों से आधा लीटर दूध का पैकेट के लिए पैसे बढ़ाने को कहा है हालांकि एक लीटर दूध का पैकेट लेने के लिए पुरानी कीमत ही देनी होगी। सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम करने के लिए यह कदम उठाया है।
2 अक्तूबर आधा लीटर पैकेट का कम हो उत्पादन
जानकारी के अनुसार पशुपालन और डेयरी सचिव अतुल चतुर्वेदी ने अमूल और दूसरी प्रमुख डेयरी कंपनियों से आधा लीटर वाले पैकेट का उत्पादन कम करने के लिए कहा है। इसके साथ ही एक लीटर के पैकेट का दोबारा इस्तेमाल करने के लिए भी कहा है। एक लीटर का पैकेट वापस करने वाले ग्राहकों को छूट देने के लिए कहा गया है। सरकार ने डेयरी कंपनियों से कहा है कि वो खाली पैकेट का इस्तेमाल सड़क निर्माण में प्रयोग करने के लिए दें। इसके साथ ही दो अक्तूबर से आधा लीटर पैकेट का उत्पादन कम कर दें।
पैकेट लेना अब महंगा होगा
वहीं दूध के अलावा दही और अन्य दुग्ध उत्पाद सबसे ज्यादा छोटे पैकेट में बिकते हैं। इनमें सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग होता है। अब सरकार इनका प्रयोग कम करना चाहती है। सरकार का मानना है कि कीमत ज्यादा होने पर लोग इनका इस्तेमाल करना कम कर देंगे। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार देश में रोजाना 20 हजार टन प्लास्टिक कूड़ा जेनरेट होता है, जिसमें से केवल 14 हजार टन ही इकठ्ठा हो पाता है। ऐसे में इस कूड़े से पर्यावरण पर काफी असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे भी सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम करने के लिए लोगों से 15 अगस्त को अपील कर चुके हैं।
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