एयर इंडिया वित्तीय संकट की चपेट में है और गुरुवार को, इंडियन ऑयल कॉर्प ने बकाया भुगतान न करने के कारण रांची, मोहाली, पटना, विजाग, पुणे और कोचीन हवाई अड्डों पर एयरलाइन के लिए ईंधन की आपूर्ति रोक दी।
एयर इंडिया वित्तीय संकट की चपेट में है और गुरुवार को, इंडियन ऑयल कॉर्प ने बकाया भुगतान न करने के कारण रांची, मोहाली, पटना, विजाग, पुणे और कोचीन हवाई अड्डों पर एयरलाइन के लिए ईंधन की आपूर्ति रोक दी। कंपनी पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पैसे नहीं होने की वजह से संचालन में भी कठिनाई आ रही हैं। 22 अगस्त को 6 टर्मिनल पर तेल कंपनियों ने एयर इंडिया को ईंधन देने से मना कर दिया। एयरलाइन के पास अपने कर्मचारियों को देने तक के लिए पैसे नहीं हैं। पिछले दिनों सरकार ने कंपनी में व्यापक स्तर पर सभी नियुक्तियों और पदोन्नतियों को रोकने का निर्देश दिया था।

आपको बता दें कि सरकार एयर इंडिया के लिए बोली लगाने वालों को ढूंढ रही है। इस दिशा में युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। निजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (गोएम) का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार, अगले सप्ताह GoM की बैठक होने वाली है। रिर्पोट के अनुसार, पहले एयर इंडिया के अधिकारियों की एक आंतरिक बैठक होगी। तो वहीं मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार एयर इंडिया में 100 प्रति शेयर बेचने की तैयारी में है।
तो वहीं पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी, जिसके अनुसार, एयरलाइन पर 58000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है, जबकि पूरा नुकसान करीब 70000 करोड़ रुपये का है। एयरलाइन को हर महीने 300 करोड़ तो केवल कर्मचारियों की सैलरी के लिए चाहिए।
इसके अलावा एयरलाइन के पास अक्टूबर के बाद कर्मचारियों को देने के लिए पैसे भी नहीं बचे हैं। ऐसे में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेलवे मिनिस्टर पीयूष गोयल और नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं) जल्द ही के तकदीर का फैसला करेंगे।
लोगों के मुताबिक, एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अश्वनी लोहानी ने पहले ही मंत्रालय को फंड संकट के बारे में सूचित कर दिया है। एयर इंडिया को वेतन के लिए प्रति माह ~ 300 करोड़ की जरूरत है और अक्टूबर से आगे वेतन देने के लिए पैसा नहीं है।


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