गृह मत्रालय ने सभी पैरामिलिट्री फोर्सेज की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर 60 साल कर दी है।
केंद्र सरकार ने लाखों जवानों को दिवाली से पहले ही एक शानदार तोहफा दे दिया है। जी हां गृह मत्रालय ने सभी पैरामिलिट्री फोर्सेज की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर 60 साल कर दी है। यानी मोदी सरकार ने उनकी रिटायरमेंट उम्र में 3 साल की बढ़ोत्तरी कर दी है। आपको बता दें कि पहले विभिन्न पदों पर अफसर 57 साल में रिटायर हो रहे थे। तो आइए आपको रिटायरमेंट से संबंधित इस खबर को थोड़ा विस्तार से बताते हैं।
तुरंत लागू हो गया है आदेश
बता दें कि यह आदेश तुरंत लागू हो गया है। यानि कि जिन अफसरों का रिटायरमेंट होने वाला था वह अब 3 साल बाद रिटायर होंगे। यह आदेश 6 मिलिट्री फोर्स केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और असम राइफल्स पर लागू होगा।
जनवरी में लिया गया था फैसला
गृह मंत्रालय का यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी में दिए गए फैसले के बाद आया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि सभी रैंक के लिए एक रिटायरमेंट उम्र तय करें। इससे पहले अलग-अलग रैंक के लिए अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र तय थी। अब तक कई रैंक के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 57 साल थी।
इन अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र थी 60 वर्ष
वर्तमान समय में अर्धसैनिक बलों में- भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में रिटायरमेंट की उम्र की दो सीटें हैं। डीआईजी और इससे ऊपर के रैंक के अधिकारी 60 वर्ष की आयु पूरी करके रिटायर होते हैं। तो वहीं कमांडेंट और उसके नीचे की रैंक पर रिटायमेंट उम्र 57 वर्ष तय है।
गृह मंत्रालय की मंजूरी होगी अंतिम
रिर्पोट के अनुसार इस संबंध मे आदेश गृह मंत्रालय की अंतिम मंजूरी के बाद जारी किया जाएगा। सभी वर्गों के साथ कुछ दौर की सलाह के बाद यह विश्लेषण किया गया है कि युवा से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी कर्मियों की रिटायरमेंट की उम्र मौजूदा समय में कुछ मामलों में 57 साल के बजाय 60 साल तय की जानी चाहिए।
लाखों सैनिकों को मिलेगा फायदा
आपको बता दें कि भारत में 5 प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल हैं। इनमें लगभग 10 लाख जवान कार्यरत हैं। जो सीमाओं की सुरक्षा से लेकर विभिन्न आंतरिक सुरक्षा ड्यूटियों में तैनात रहते हैं। इस निर्णय से उन सभी सेनानी और उनके नीचे के श्रेणी के कर्मियों जो इस संख्या का 60% हिस्सा हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा।


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