एक फिर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं मंदी का संकेत दे रही हैं और इसका अगला चरण वैश्विवक मंदी होगा।
आप सबको सन् 2008 की आर्थिक मंदी तो याद ही होगी जब हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे और करोड़ों का नुकसान हुआ था। एक फिर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं मंदी का संकेत दे रही हैं और इसका अगला चरण वैश्विवक मंदी होगा। मॉर्गन स्टेनली की रिर्पोट के अनुसार आने वाले अगले 9 महीने में एक बार फिर आर्थिक मंदी आने के संकेत मिल रहे हैं। इस बार मंदी के कौन-कौन से कारण वो आपको यहां पर पता चलेगा।
यील्ड का का उल्टा होना प्रमुख कारण
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव दुनिया को संदेह की ओर ढ़केलने वाला मुख्य कारक है। मंदी के अन्य विश्वसनीय संकेतक भी सामने आ रहे हैं, जिसमें यील्ड का उल्टा होना है। मंदी से पहले भी बांड यील्ड के ग्राफ का कर्व उलटा हुआ था और यह अब लगभग वैसा ही हो रहा है जैसा कि 2008 के वित्तीय संकटों से पहले देखने को मिला था।
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार भी वजह
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि अगर अमेरिका के जरिये व्यापार युद्ध फिर से भड़कता है और वह चीन से सभी सामानों पर शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर देता है, तो दुनिया में तीन तिमाहियों में ही मंदी आ जाएगी। फिलहाल भारत में मंदी के उतने लक्षण नहीं दिख रहे हैं, लेकिन वाहन उद्योग जैसे कुछ क्षेत्र खतरनाक रूप से मंदी के करीब हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में पिछली तीन तिमाहियों में गिरावट ही रही है और विकास का पूर्वानुमान भी नहीं बढ़ रहा है। औद्योगिक उत्पादन और कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर दोनों क्षेत्रों में गिरावट देखी गई है।
इन देशों पर प्रमुख रुप से है मंदी का खतरा
इसके अलावा ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ब्रेक्जिट के कारण राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से वहाँ दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद सिकुड़ गया है, जिससे मंदी की आशंका बढ़ गई है।
बेंचमार्क नीतिगत दरों में कटौती
आपको बता दें कि वैश्विक भुगतान के बीच, वैश्विक केंद्रीय बैंक कार्रवाई में जुट गए हैं। भारत ने बेंचमार्क नीतिगत दरों में 35 आधार अंक की कटौती की, न्यूयॉर्क ने 50 आधार अंक और थाईलैंड ने भी आश्चर्यजनक रूप से 25 आधार अंकों की कटौती की है। हालांकि, भारत में मंदी का खतरा नहीं है, लेकिन सरकार और नीति निर्माता इसकी अनदेखी नहीं कर सकते और उन्हें जरूरी कदम उठाने होंगे।
ऑटो सेक्टर में करना होगा सुधार
तो वहीं भारत में औटो सेक्टर का हाल बुरा है। मांग में भारी कमी है। जीडीपी में इसका योगदान 7 प्रतिशत है। GST कलेक्शन में 11 प्रतिशत योगदान है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में इसका योगदान 50 प्रतिशत तक है। मंदी की वजह से 300 डीलरशिप बंद हो चुकी है। हजारों लोगों की नौकरी जा चुकी है। तमाम रिपोर्ट का दावा है कि अगर यह सेक्टर मंदी से जल्द नहीं उबरा तो आने वाले कुछ महीनों में 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके साथ ही इनसे अलग लाखों लोग जो परोक्ष रूप से इस सेक्टर से जुड़े हैं वे भी बेरोजगार हो सकते हैं।
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