नई दिल्ली। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी खस्ताहाल है। अब स्थिति यह है कि पाक के पास खजाने में इतनी ही विदेशी पूंजी बची है, जिससे वह केवल 2 महीने का आयात ही कर सकता है। अगर पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति नहीं सुधरी तो वह या तो 2 महीने में दिवालिया हो सकता है, या जरूरत का सामान आयात नहीं कर पाएगा। वहीं आशंका है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) समीक्षा में पाकिस्तान को काली सूची में डाल सकता है। इससे उसकी वैश्विक वित्तीय प्रणाली में पहुंच कम हो जाएगी। इसका असर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी पड़ सकता है।

पाकिस्तान की समाचार कंपनी दि न्यूज की वेबसाइट द न्यूज डॉट कॉम में बताया गया है कि पाकिस्तान अपनी एफएटीएफ में समीक्षा के दौरान चीन और दो अन्य विकाशसील देशों से मदद की उम्मीद कर रहा है। पाकिस्तान को पेरिस स्थित अंतर्राष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पिछले साल ही आतंकवादियों के वित्त पोषण रोकने के उपाय करने को कहा था, जिसकी आखिरी समीक्षा अक्टूबर 2019 में होनी है।
एफएटीएफ के सदस्य देशों में भारत भी शामिल है। पाकिस्तान को अच्छी तरह पता है कि वह एफएटीएफ के मनी लॉड्रिंग के 27 मानकों की समीक्षा में खरा नहीं उतर पाएगा। भारत भी समीक्षा करने वालें देशों में शामिल होगा, ऐसे में पाकिस्तान अभी से मदद के उपाए खोज रहा है। अभी एफएटीएफ ने पाकिस्तान को निगरानी सूची यानी ग्रे लिस्ट में डाला हुआ है। अगर पाकिस्तान मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे ईरान और उत्तर कोरिया की तरह ही ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। पाकिस्तान सिर्फ चीन, मलेशिया और तुर्की की मदद के भरोसे ही यह उम्मीद लगा रहा है कि शायद वह ब्लैक लिस्ट में जाने से बच जाए।
वहीं स्टेट बैंक पाकिस्तान के गर्वनर डॉर रेजा बकीर ने संवाददाताओं को संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस स्थिति से बचने के लिए परदे के पीछे लॉबिंग चल रही है। उन्होंने कहा कि धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, और एफएटीए द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
हालांकि एफएटीएफ की समीक्षा बैठक में क्या होगा, यह तो किसी को नहीं पता है। लेकिन आने वाले 2 महीने पाकिस्तान के लिए कठिन हैं। इन दो महीनों में पाकिस्तान दिवालिया भी हो सकता है।
तय सीमा से ज्यादा ले लिया कर्ज
पाकिस्तान पर सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 27.8 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। पाकिस्तान अब कर्ज की अपनी निर्धारित उच्चतम सीमा को भी पार कर गया है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की तरफ से जारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी यह अनुमान जारी किया था कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में पाकिस्तान का वित्तीय घाटा जीडीपी की तुलना में बढ़कर 7.9 फीसदी हो जाएगा।
पाक को घटाना होगा कर्ज
पाकिस्तानी के अखबार डॉन के अनुसारा राजकोषीय जवाबदेही और कर्ज सीमा एक्ट 2005 के अनुसार पाक की सरकार इस बात के लिए बाध्य है कि सार्वजनिक कर्ज घटाए। इस एक्ट के अनुसार कुल सार्वजनिक कर्ज को घटाकर आगाकमी दो वित्तीय वर्ष के अंदर जीडीपी के 60 फीसदी तक के स्तर पर लाया जाए।
महंगाई भी बेकाबू
पाक में इस समय महंगाई दर करीब 7.5 फीसदी रही है। वहीं ब्याज दरें करीब 10.75 फीसदी के आसपास हैं। कानून के मुताबिक पाक सरकार इस बात के बाध्य हैं कि संसद को कर्ज सीमा पार करने की जानकारी दे। हालांकि इमरान सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।
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