हर माता-पिता अपने पुत्र की तरह अपनी बेटियों को भी शिक्षित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसका रिजल्ट यह निकला है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के शिक्षित होने की दर में इजाफा हुआ है।
हर माता-पिता अपने पुत्र की तरह अपनी बेटियों को भी शिक्षित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसका रिजल्ट यह निकला है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के शिक्षित होने की दर में इजाफा हुआ है। हालांकि नौकरी पाने के मामले में महिलाएं अभी भी बहुत पीछे हैं। नेशनल सैंपल डेवलपर आर्गेनाइजेशन (NSSO) के सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी प्रशिक्षण पाने के बाद रोजगार पाने में महिलाएं पुरुषों की तुलना में काफी पीछे हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल तकनीकी प्रशिक्षण पाने वालों में लगभग 70 प्रतिशत युवक और 38 प्रतिशत युवतियों को ही रोजगार मिल पाता है। तो वहीं बाकी महिलाओं को रोजगार नहीं मिल पाता है। एनएसएसओ ने सर्वेक्षण के दौरान तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में प्रशिक्षण लेने वाले 21 अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़े सूचीबद्ध किए। इस सर्वे में 15 से 59 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया गया है।
साथ ही देश में तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले लोगों का प्रतिशत 3 से कम है। वहीं 15 से 29 साल के 2.8 प्रतिशत लोग केवल तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा कर पाते हैं। इसमें से ग्रामीण बेरोजगारी दर 17.4 प्रतिशत है। इसके अलावा शहरी बेरोजगारी दर 18.7 प्रतिशत है। वहीं महिलाओं में बेरोजगारी दर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है। 13.6 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं बेरोजगार बनी हुई हैं, जबकि 27.2 प्रतिशत शहरी युवतियां बेरोजगार बनी हुई हैं।
इस सर्वे से यह प्रतीत होता है कि कैसे भी करके महिलाओं को उनके अभिभावक पढ़ाने के लिए तो तैयार हो जाते हैं लेकिन बाद में जॉब करने की परमिशन नहीं देते हैं। तो वहीं कुछ लड़़कियों को शादी के बाद जॉब करने की इजाजत नहीं मिलती है। तो अब वक्त है कि जिस तरह महिलाओं को शिक्षित किया जा रहा है ठीक उसी तरह उन्हें नौकरी भी करने की इजााजत मिले। ताकि सचमुच में वो पुरुषों को टक्कर दे सकें।


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